
Ranchi : झारखंड पूरे देश में नशे के कारोबार का कॉरिडोर बना हुआ है. झारखंड से होकर अफीम-डोडा जैसे मादक पदार्थ देश के दूसरे हिस्सों खास कर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश होते हुए दिल्ली-मुंबई तक पहुंच रहा है. अफीम की खेती और इसकी तस्करी को लेकर झारखंड के नक्सल प्रभावित क्षेत्र हमेशा से बदनाम रहे हैं. रांची, खूंटी, चतरा, हजारीबाग, लातेहार जिले में सबसे अधिक अफीम की खेती के सबूत मिलते रहे हैं. हाल ही में पूरे राज्य में दर्ज एनडीपीएस एक्ट (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट) से जुड़े मामले की सीआईडी में समीक्षा की गई थी. पांच वर्ष तक के मामले में की गई समीक्षा में इस बात का पता चला है कि राजधानी रांची के लोअर बाजार, नामकुम, सुखदेवनगर समेत राज्य के दो दर्जन थानों में 20 से अधिक मामले दर्ज किये गये हैं. वहीं इन पांच वर्ष 2019 से 2023 तक राज्य में एनडीपीएस एक्ट के तहत 2386 मामले दर्ज किये गये. इनमें सबसे अधिक राजधानी रांची के लोअर बाजार थाना में 29, नामकुम थाना में 24, सुखदेवनगर थाना में 42, हजारीबाग जिले के सदर थाना में 21, कटकमसांडी थाना में 41, चौपारण थाना में 36, खूंटी जिले के खूंटी थाना में 35, सायको थाना में 36, अड़की थाना में 47, मुरहू थाना में 42, मारंगदाहा थाना में 62 चतरा जिले के सदर थाना में 118, कुंदा थाना में 84, लावालौंग थाना में 73, वशिष्ठनगर थाना में 61, राजपुर थाना में 34, प्रतापपुर थाना में 41, हंटरगंज थाना में 25, गिद्धौर थाना में 23 लातेहार जिले के बालूमाथ थाना में 28, जमशेदपुर जिले के मानगो थाना में 47, सीतारामडेरा थाना में 46, सरायकेला-खरसावां जिले के आदित्यपुर थाना में 61, गुमला जिले के गुमला थाना में 71 मामले बीते पांच वर्ष में दर्ज किये गये हैं.
चतरा, रांची, जमशेदपुर, खूंटी, हजारीबाग, सरायकेला जिले में दर्ज हुए सबसे अधिक मामले
अफीम की खेती के लिए झारखण्ड की मिट्टी और जलवायु काफी मुफीद है. जिसकी वजह से हजारों एकड़ जमीन पर इसकी अवैध तरीके से खेती की जा रही है. पहले इसके पीछे नक्सली हुआ करते थे लेकिन अब आम ग्रामीण भी इससे होने वाली मोटी कमाई की वजह से इसकी खेती से जुड़ गए हैं. एक किलो अफीम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों की है. पुलिसिया कार्रवाई के बाबजूद मोटी कमाई की वजह से साल दर साल इसकी खेती में इजाफा हो रहा है. पुलिस का मानना है कि इसके पीछे कुछ ऑर्गनाइज्ड गैंग भी काम कर रहे हैं. हालांकि पुलिस इसके खिलाफ जागरुकता अभियान भी चला रही है. पिछले पांच वर्ष में झारखंड में 2386 मामले दर्ज किये गये है. इनमें सबसे अधिक चतरा में 506, रांची में 278, जमशेदपुर में 255, खुंटी में 249, हजारीबाग में 179, सरायकेला में 128, गुमला में 126, पलामू में 90, लातेहार में 66, चाईबासा में 62, देवघर में 49, रेल जमशेदपुर में 46, गोड्डा में 43, सिमडेगा में 39, साहेबगंज में 37, धनबाद में 35, बोकारो में 35, गढ़वा में 31, रामगढ़ में 27, गिरिडीह में 26, कोडरमा में 16, दुमका में 16, पाकुड़ में 15, रेल धनबाद में 15, लोहरदगा में 9, जामताड़ा में 6 और एटीएस में 2 मामले दर्ज किये गये हैं.
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