
Ranchi. भाजपा ने राज्य सरकार पर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाया है. राज्य को विकास की बजाय विनाश की राह पर ले जाने की भी बात कही है. प्रदेश भाजपा कार्यालय में आज प्रेस कॉन्फ्रेंस में हजारीबाग सांसद जयंत सिन्हा ने कहा कि राज्य के पास अपार साधन हैं पर निकम्मी सरकार के कारण राज्य विकास की राह पर आगे नहीं बढ़ पा रहा है. अभी देश का और राज्यों के बजट सत्र का समय है. झारखंड सरकार भी अगले कुछ दिनों में बजट पेश करेगी.
राज्य सरकार के स्वयं का बजट 2021-22 में 91 हजार 277 करोड़ का है. इसमें से करीब 40 हजार करोड़ का योगदान ग्रांट के तौर पर केंद्र से है. लेकिन यह सरकार दिन रात केवल साधनों की कमी का रोना रोती है, जबकि साधनों की कोई कमी नहीं है. सरकार केवल कमाई का तरीका ढूंढ़ रही, काम करने का नहीं. कॉन्फ्रेंस में प्रवक्ता प्रदीप सिन्हा, मीडिया प्रभारी शिव पूजन पाठक सहित अन्य भी मौजूद थे.
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डीएमएफटी में गोलमाल
जयंत सिन्हा ने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय कुप्रबंधन का शिकार है. पिछले पांच सालों में ऐसा पहली बार हुआ है कि राज्य को करीब 900 करोड़ के राजस्व का घाटा उठाना पड़ा है. देश भर में कैपिटल एक्सपेंडिचर में सबसे कम निवेश करने वाले राज्यों में से झारखंड है. पड़ोसी राज्य बिहार, पश्चिम बंगाल में अपने बजट का 19 फीसदी कैपिटल एक्सपेंडिचर पर खर्च हो रहा है जबकि यहां मात्र 17 फीसदी. इस एक्सपेंडिचर के तहत सड़क, पुल, अस्पताल का निर्माण करने से विकास की गति को रफ्तार मिलती है. आर्थिक प्रभाव तीन गुना बढ़ता है. इस पर ध्यान देने की बजाये वेतन, पेंशन आदि पर खर्च होने वाला एस्टेब्लिशमेंट एक्सपेंडिचर बढ़ाया गया है. तुलनात्मक तौर पर यह दूसरे राज्यों से 10 फीसदी ज्यादा है जो फिजूलखर्ची है.
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डीएमएफटी कलेक्शन की राशि 6533 करोड़ में से केवल 79 फीसदी ही आवंटित किया गया है. इसका भी केवल 46 फीसदी ही उपयोग किया जा सका है. पारदर्शिता की कमी डीएमएफटी फंड के उपयोग में है. इसके खर्चे की कोई जानकारी लोगों के पास नहीं है. इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने और थर्ड पार्टी से ऑडिट की जरूरत राज्य को है.
बिजली कंपनियों की वार्षिक रेटिंग में झारखंड की बिजली कंपनी देश की बिजली वितरण कंपनियों में 41 में से 37 वें पायदान पर है. अक्टूबर 2021 तक झारखंड पर डीवीसी का हजारों करोड़ बकाया था. अभी स्थिति यह है कि सरकार राज्य को अंधेरे में डूबने को छोड़ केवल अपना चेहरा चमकाने में लगी है. पेयजल एवं स्वच्छता मिशन के तहत मात्र 19 फीसदी ग्रामीण परिवारों को ही पानी मुहैया कराया जा सका है. पानी की उपलब्धता में देश में सबसे नीचे के तीन नामों में से यह राज्य है. यही हाल ग्रामीण विकास, मनरेगा, महिला एवं बाल विकास, कृषि, स्वास्थ्य का भी है.
लोकतांत्रिक मर्यादा फेल
जयंत सिन्हा के मुताबिक बरही में पिछले दिनों रूपेश पांडेय की हत्या हो गयी. उन्हें और पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश को उसके परिजनों से नहीं मिलने दिया गया. राज्य में लोकतांत्रिक मर्यादाओं को ताक पर रखा गया. इससे राज्य में विधि व्यवस्था की पोल खुल गयी है.
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