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पश्चिम बंगाल का अवैध कोयला झारखंड के जामताड़ा से पार कराया जाता है, प्रति ट्रक 20 हजार वसूलती है पुलिस

आज से 13-14 साल पहले डीजीपी का रसूख ऐसा था.

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Saurabh Singh

Ranchi:  बात वर्ष 2005-06 की है. वीडी राम राज्य के डीजीपी थे और आरके मल्लिक रांची के एसएसपी. एक शाम श्री मल्लिक को सूचना मिली की खलारी क्षेत्र में अवैध कोयला कारोबार चल रहा है. वह सूचना की जांच करवाते, उससे पहले ही दूसरे दिन सुबह डीजीपी वीडी राम ने श्री मल्लिक को बुलाकर यही सूचना दी और कार्रवाई करने को कहा.

जिसके तुरंत बाद श्री मल्लिक ने खलारी थाना प्रभारी को निलंबित कर दिया. फिर मामले की जांच शुरु हुई. तब यह तर्क दिया गया था कि अगर डीजीपी (पुलिस विभाग के मुखिया) के पास सूचना है, तो उसमें कोई लेकिन-परंतु नहीं हो सकता. प्रथम दृष्टया सूचना सही ही होगी. तो आज से 13-14 साल पहले डीजीपी का रसूख ऐसा था. ऐसा था पुलिस प्रमुख का इकबाल और खनक.

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जरा सोंचिये, आज क्या हालात है. एसपी-डीआइजी रैंक के अफसर अवैध कोयला कारोबार में सीधे तौर पर इंवॉल्व हैं. हर माह करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की जा रही है. सीआइडी, स्पेशल ब्रांच, निगरानी सब सेट है. पुलिस मुख्यालय के स्तर से शायद ही इस पर रोक लगाने के लिये आदेश जारी किया जाता है.

आदेश जारी किया भी जाता है, तो जिलों के एसपी औऱ रेंज के डीआइजी पर इसका असर नहीं पड़ता. तो क्या डीजीपी पद का रुआब, इकबाल, रसूख, खनक सब खत्म हो गया या बात कुछ और है.

न्यूज विंग ने हजारीबाग में चल रहे लिंकेज कोयले के अवैध कारोबार की खबर दो दिन तक प्रकाशित किया. आज हम संथाल परगना के जामताड़ा जिला पुलिस के संरक्षण में चल रहे अवैध कोयला कारोबार पर खबर कर रहे हैं.

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पूरे काम में लगा है एक सिंडिकेट

जानकारी के मुताबिक, जामताड़ा के मिहिजाम इलाके के हांसी पहाड़ी स्थित नगर भवन के पास अवैध कोयला कारोबारियों ने कोल डीपो बनाया है. यहां पर बंगाल से चोरी करके लाये जाने वाले कोयले को जमा किया जाता है. फिर रात में इस अवैध कोयला को ट्रकों पर लोड करके बिहार के जमुई इलाके में पहुंचा दिया जाता है. 24 अप्रैल को प्रभात खबर और हिन्दुस्तान में इससे संबंधित खबर भी छपी. पर कार्रवाई अब तक नहीं हुई. खबर भी जामताड़ा में ही छपकर रह गयी और वहां तो सब सेट ही है.

खबर के मुताबिक, इस काम में एक सिंडिकेट लगा हुआ है. यह सिंडिकेट अवैध कारोबार कर रहा है. जामताड़ा के मिहिजाम होते हुए सिंडिकेट में सतपाल यादव, अल्लारखा, मंटू शर्मा आदि शामिल हैं. सूत्रों के मुताबिक, कोयले के इस अवैध कारोबार को पुलिस का संरक्षण प्राप्त है. जामताड़ा जिला की पुलिस को प्रति ट्रक 20 हजार रुपया मिलता है. अवैध कमाई के लिहाज से इस जिले के कनीय पदाधिकारी भी हजारीबाग की तरह ही नुकसान में हैं. हर दिन 30-40 ट्रक अवैध कोयला निकल रहा है.

उल्लेखनीय है कि करीब दो माह पहले राज्य के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने धनबाद में अपने एक संबोधन में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा था कि उनका एक रिश्तेदार कोयला चोरी करवाता है. सवाल यह है कि वही चोरी का कोयला जब झारखंड के दो जिलों से होकर पार करता है, तो इसे क्या समझा जाये.

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