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हजारीबाग में फिर शुरू हुआ लिंकेज कोयले का अवैध कारोबार, पुलिस के दो अफसरों को हर माह मिलता है 1.50 करोड़ रुपया

Saurabh Singh

Jharkhand Rai

Ranchi: हजारीबाग में एक बार फिर से लिंकेज कोयले का अवैध कारोबार शुरु हो गया है. यह अवैध कारोबार करीब चार माह से चल रहा है. स्थानीय फैक्टरियों को सब्सिडाईज्ड दर पर मिलने वाले कोयले को बनारस की मंडियों तक पहुंचाने का काम हर रोज हो रहा है.

इस काम को करने वाले महत्वपूर्ण लोगों में शंभू सिंह, सुनील सिन्हा, दीना यादव, अभय सिंह आदि शामिल हैं. ये सभी लोग सत्ताधारी पार्टी के एक शीर्ष नेता के साथ अक्सर देखे जाते हैं.

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हजारीबाग पुलिस को मैनेज करने की भी खबर

कोयले के इस कारोबार को शुरु करने से पहले हजारीबाग पुलिस को मैनेज कर लिये जाने की खबर है. कोयले के इस अवैध कारोबार से होने वाली अवैध कमाई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हर माह करीब दो करोड़ रुपया तो सिर्फ पुलिस तक पहुंच रहा है.

सूचना है कि सिर्फ दो पुलिस अफसरों को 1.50 करोड़ रुपया हर माह दिया जा रहा है. एक करोड़ रुपया एक पुलिस अफसर को और 50 लाख रुपया दूसरे को. थाना स्तर के पुलिस अफसरों को मैनेज करने में करीब 50 लाख रुपया प्रति माह खर्च किया जा रहा है.

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180 लोगों को हर माह होता है आवंटन

सूत्रों ने बताया कि सीसीएल से 180 लोगों को लिंकेज कोयला का हर माह आवंटन होता है. सब्सिडाईज्ड दर पर उन्हें कोयला देने का मकसद यह है कि स्थानीय छोटी कंपनियों को मदद मिल सके और लोगों को रोजगार मिल सके.

लेकिन जिन्हें भी लिंकेज कोयला मिलता है, वह फैक्टरी को चलाते ही नहीं हैं और जो कोयला मिलता है, उसे बनारस व डेहरी की मंडियों में ले जाकर बेच देते हैं. इसकी शिकायत मिलने पर वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश पर लिंकेज कोयला के प्रावधान को खत्म कर दिया गया था. लेकिन करीब छह माह से इसे फिर से शुरु कर दिया गया है.

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