
Ranchi: हजारीबाग और रामगढ़ जिले में लिंकेज कोयला का अवैध कारोबार का खेल चल रहा है. मिली जानकारी के अनुसार जेएसएमडीसी और सीसीएल के लिंकेज कोयला को छोटे उद्योगों जैसे हार्डकॉक भट्ठा, गोल भट्ठा, सॉफ्ट कोक भट्ठा आदि को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार सस्ते दर पर उपलब्ध करवाती है.
फैक्ट्री मालिक लिंकेज कोयला में फैक्ट्री इस्तेमाल नहीं कर कोयले का अवैध कारोबार कर ज्यादा मुनाफा कमा रहे है. लिंकेज कोयला का फर्जी काजग बनाकर यूपी के वाराणसी और बिहार के डेहरी मंडी में भेजा जा रहा है.
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अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा कारोबार
मिली जानकारी के अनुसार हजारीबाग और रामगढ़ में लिंकेज कोयला का अवैध कारोबार कई अधिकारियों के मिलीभगत से हो रहा है. जेएसएमडीसी व सीसीएल के लिंकेज कोयले की आड़ में करीब 250 करोड़ रुपये के कोयले की तस्करी कर कोयले की हेराफेरी का खेल चल रहा है.
दरअसल, ऐसे कोयले को पीएलसी (Private Sector Coal Linkage) कहते हैं. पीएलसी के तहत काफी कम दर पर इस शर्त के साथ कोयला दिया जाता है कि कोयले का इस्तेमाल जिले के आस-पास के कल-कारखानों के लिए हो. लेकिन कुछ कंपनी और माफिया मिलकर कोयले को खुले बाजार में बेचने का काम करते हैं. ऐसा करने से कंपनी और माफिया को काफी मोटी आमदनी होती है.
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लिंकेज कोयला के खुले बाजार में बिकने का हुआ था खुलासा
लिंकेज कोयला लेने के बाद फैक्ट्री उसे खुले बाजार में भारी मुनाफा कमा कर बेच देती हैं. इस सूचना पर फरवरी 2020 में हजारीबाग जिला प्रशासन ने कार्रवाई की. कार्रवाई के दौरान यह पता चला कि 103 ट्रक कोयला खुले बाजार में बेचने के लिए ले जाया जा रहा था.
सीसीएल के दस्तावेज से मिलान के बाद कंपनियों के नाम का पता चला. जिसके बाद हजारीबाग डीसी भूवनेश प्रताप सिंह ने उन सभी 12 कंपनियों को मिलनेवाले कोयले के आवंटन को रद्द करने के लिए खान विभाग को पत्र लिखा. फिर डीसी कोर्ट में मामले की सुनवाई हुई.
सुनवाई के बाद हजारीबाग के डीसी ने करीब 62 लाख का जुर्माना लगा कर 50 ट्रकों को छोड़ दिया. साथ ही संबंधित कंपनियों पर कोयला उठाव पर लगी पाबंदी हटा ली गयी.
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