
Jamtada. दहेज प्रथा समाज के लिए एक अभिशाप है. अब जो कोई व्यक्ति दहेज लेगा-देगा, उसका निकाह किसी भी इमाम या काजी द्वारा नहीं पढ़ाया जाएगा. क्योंकि दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेने वाला, देने वाला और दहेज लेन-देन में शामिल रहने वाला सभी बराबर के गुनहगार हैं. ये बातें दहेज़ रोकथाम कमिटी के सचेतक गाज़ी रहमतुल्लाह रहमत ने कही. उन्होंने कहा कि दहेज रोकथाम को लेकर नारायणपुर प्रखंड में 14 मार्च को एक बैठक रखी गई है, जिसमें जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह और धनबाद जिले के बुद्धिजीवी शामिल होंगे.
उन्होंने कहा कि दहेज प्रथा उन्मूलन के लिए सामाजिक एवं मानसिक क्रांति की जरूरत है. दहेज एक बुराई है और इससे निजात जरूरी है. इस बात से सभी लोग सहमत हैं. बावजूद इसके यह बुराई दूर नहीं हो रही है. समाज के सभी वर्ग के लोग जागरूकता से ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं. उन्होंने समाज के सभी लोगों से दहेज प्रथा को खत्म करने की अपील की
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उन्होंने कहा कि दहेज मुक्त समाज बनाने के लिए जन जागरण चलाया जाएगा. गांव गांव में नुक्कड़ सभा, जनसभा या आम सभा आयोजित कर लोगों को दहेज के खिलाप एक सूत्र में बंधा जाएगा.
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