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IAS और IFS से भी नहीं संभला जेपीएससी, दो अध्यक्ष भी नहीं करा सके प्रक्रिया पूरी, लोकसभा चुनाव के बाद ही परीक्षा की संभावना

पूर्व अध्यक्ष डीके श्रीवास्तव थे पीसीसीएफ रैंक के अफसर और वर्तमान अध्यक्ष के विद्यासागर हैं अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर

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Ravi  Aditya

Ranchi:  जेपीएससी ( झारखंड लोक सेवा आयोग) शायद देश का पहला ऐसा आयोग है, जिसका विवादों से गहरा नाता रहा है. 1151 दिन गुजर जाने के बाद भी छठी जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई. पूर्व अध्यक्ष सह प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) रैंक अफसर डीके श्रीवास्तव के समय छठी जेपीएससी प्रतियोगिता परीक्षा की प्रक्रिया शुरू हुई थी. उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य सरकार ने अपर मुख्य सचिव रैंक के अफसर के विद्यासागर को जेपीएससी का अध्यक्ष बनाया. इनका भी कार्यकाल 13 नवंबर को समाप्त हो जायेगा. फिर नये अध्यक्ष की तलाश शुरू हो जायेगी. अब तक मुख्य परीक्षा का एडमिट कार्ड भी निर्गत नहीं किया गया है. सूत्रों के अनुसार अभ्यर्थियों के कागजातों की स्क्रूटनी ही चल रही है. ऐसे में अब लोकसभा चुनाव के बाद ही छठी जेपीएससी मुख्य परीक्षा की संभावना दिख रही है.

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ऐसे चल रही है नियुक्ति की प्रक्रिया

जेपीएससी ने 17 अगस्त 2015 को छठी संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता (प्रारंभिक) परीक्षा का विज्ञापन जारी किया था.

 फिर इसे वापस लेकर 30 अक्तूबर 2015 को फिर से 326 पदों के लिये विज्ञापन जारी किया.

 18 दिसंबर 2016 को हुई पीटी परीक्षा

 23 फरवरी 2017 को पीटी का रिजल्ट जारी किया गया. इसमें कुल 5,138 अभ्यर्थी सफल रहे.

फिर 11 अगस्त 2017 को पीटी का संशोधित रिजल्ट निकला. इसमें 965 और अभ्यर्थियों को जोड़ा गया. इस हिसाब से कुल 6,103 अभ्यर्थी सफल रहे.

फिर तीसरी बार छह अगस्त 2018 को संशोधित रिजल्ट जारी किया गया. इसमें 34,634 अभ्यर्थी सफल रहे.

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जेपीएससी पर अब तक 33 करोड़ खर्च, फिर भी परिणाम में गड़बड़झाला

आरोपों और विवादों से झारखंड लोक सेवा आयोग का गहरा नाता रहा है. जेपीएससी पर 33 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. लेकिन एक भी रिजल्ट पाक-साफ नहीं निकला. जेपीएससी देश का पहला ऐसा आयोग है, जिसके अध्यक्ष पद पर रहते ही कार्रवाई हुई. पहली सिविल सेवा, द्वितीय सिविल सेवा, व्याख्याता, बाजार पर्यवेक्षक, सहकारिता और जेट परीक्षा विवादों के घेरे में रही. काफी हंगामे के बाद निगरानी जांच का आदेश दिया गया. द्वितीय सिविल सेवा से चयनित 166 अफसरों को कार्यमुक्त भी किया गया. प्रथम सीमित प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करनी पड़ी. जेट परीक्षा का रिकॉर्ड भी गायब किया गया. इन सभी परीक्षाओं में अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप है.

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