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हाई कोर्ट ने वर्ष 2018 से अब तक जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामले में गृह सचिव से मांगा जवाब

सचिव से पूछा है, जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में कोई जांच की गई थी या नहीं

Rana Pratap Singh

Ranchi: झारखंड में जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामले में झारखंड हाई कोर्ट राज्य के गृह सचिव से 3 सप्ताह में जवाब मांगा है. हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले में सरकार के गृह सचिव को वर्ष 2018 से अब तक जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत के संबंध में जवाब मांगा है. मुमताज अंसारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने यह आदेश दिया. मामले के अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी. इससे पूर्व कोर्ट के 21 अगस्त के आदेश को आलोक में, झारखंड सरकार के गृह, कारागार एवं आपदा प्रबंधन विभाग की प्रधान सचिव ने अपना व्यक्तिगत शपथ पत्र दायर किया था. जिससे यह बताया गया था कि हिरासत में मृत्यु के सभी मामलों में, चाहे वह जेल में हुई हो या न्यायिक हिरासत में, मृत्यु की सूचना मजिस्ट्रेट को दी गई थी. जिस पर खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा था कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे यह पता चले कि मजिस्ट्रेट द्वारा जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत के मामले में कोई जाँच की गई थी या नहीं. पिछली सुनवाई में खंडपीठ ने झारखंड सरकार के गृह, कारागार एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को निर्देश दिया था कि वे वर्ष 2018 से जेल या न्यायिक हिरासत में हिरासत में हुई मृत्यु के मामलों की संख्या के संबंध में अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें और यह भी बताएं कि क्या मृत्यु का तथ्य मजिस्ट्रेट के संज्ञान में लाया गया था ताकि सीआरपीसी की धारा 176 (1-ए) या भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 (2) के तहत जांच की जा सके. बता दे कि प्रार्थी मोहम्मद मुमताज अंसारी ने राज्य में जेल या न्यायिक हिरासत में हुई मौत मामले की जांच करने का आदेश देने का आग्रह कोर्ट से किया है.

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