
अधूरे बने विधानसभा भवन में सत्र बुलाने को लेकर जेएमएम का बीजेपी पर निशाना
उद्घाटन समारोह के लिए निमंत्रण कार्ड नहीं मिलने की बात हेमंत ने स्वीकारी
Ranchi: राज्य के नए विधानसभा भवन समारोह में नेता प्रतिपक्ष को आमंत्रण नहीं मिलने से नाराज जेएमएम कार्यकारी अध्य़क्ष हेमंत सोरेन ने बीजेपी पर आदिवासियों नेताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है.
चुनाव के ठीक पहले आदिवासी कार्ड खेलते हुए उन्होंने शुक्रवार को एक प्रेस वार्ता में कहा कि सत्ता पक्ष के कई आदिवासी नेताओं को उद्घाटन समारोह में संबोधित करने से रोकना क्या कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाना नहीं है.
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उन्होंने कहा है कि अधूरे बने विधानसभा भवन में एक दिन का सत्र बुलाकर रघुवर सरकार ने बता दिया है कि बीजेपी सरकार में सदन और सरकार के अंतर को ही समाप्त कर दिया है.
इस दौरान उन्होंने स्वीकारा कि समारोह में भाग लेने के लिए उन्हें कोई निमंत्रण सरकार के तरफ से नहीं भेजा गया. प्रेस वार्ता के दौरान उऩ्होंने पीएम मोदी द्वारा शुरू की गयी सभी योजनाओं की खामियों को भी प्रमुखता से रखा.
उन्होंने कहा कि अधूरे विधानसभा भवन का सरकार ने हाल में प्रवेश प्रमाण पत्र (occupancy certificate) लिया है. यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर रांची नगर निगम ने अधूरे भवन को यह सर्टिफिकेट कैसे दे दिया. जबकि हकीकत है कि आज आम आदमी को अपने भवन के लिए ऐसे सर्टिफिकेट लेने में कई मशक्कत करनी पड़ती है.
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बीजेपी में हो रही आदिवासी नेताओं की अनदेखी
नए विधानसभा भवन उद्घाटन समारोह को लेकर सरकार को घेरने के लिए हेमंत सोरेन के अप्रत्यक्ष रूप से आदिवासी चेहरों का भी चुनावी कार्ड खेला.
उन्होंने कहा कि आदिवासी बहुल राज्य में विधानसभा भवन समारोह में राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू, विधानसभा स्पीकर दिनेश उरांव, प्रोटोकॉल के तहत राज्यपाल के बाद आने वाली रांची की मेयर आशा लकड़ा, संसदीय कार्य मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा जैसे नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया गया.
जबकि स्थानीय सांसद संजय सेठ को मंच में जगह दी गयी. ऐसी घटनाओं से साफ है कि ऐसे नेताओं की उपेक्षा बीजेपी की किन सोच की ओर संकेत करती है.
आदिवासियों के शोषण का साम्राज्य कायम करेगा नया बंदरगाह
प्रधानमंत्री द्वारा नये विधानसभा भवन, साहेबगंज में बंदरगाह का उद्घाटन सहित किसानों एवं व्यापारियों के लिए पेंशन योजना की शुरूआत को लेकर भी हेमंत ने बीजेपी को घेरा.
उन्होंने कहा कि बंदरगाह के लिए 181 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है. अभी तक केवल 63 एकड़ जमीन का ही अधिग्रहण हुआ है. जिनके जमीन को लिया गया है, उन्हें अभी तक मुआवजा नहीं मिला है.
हेमंत ने कहा कि भविष्य में यही बंदरगाह झारखंड के आदिवासियों के शोषण का साम्राज्य कायम करेगा. मुंबई बंदरगाह की बात करते हुए कहा कि इसी के मदद से देश के सबसे बड़े-बड़े आपराधिक सरगना मुंबई में शरण लेते हैं.
पहले ट्रेनों से लादकर राज्य की महिलाओं की तस्करी होती थी. अब इस बंदरगाह से महिलाओं की तस्करी को बढ़ावा मिलेगा. सबसे बड़ी बात यह है कि बीजेपी ने आदिवासियों बहुल राज्य में ऐसे बंदरगाह को बनाने के लिए जनजाति सलाहकार परिषद (टीएसी) जैसी संवैधानिक संस्थाओं से बात तक नहीं की.
‘घोषणा ऐसे की, मानो कल से मिलने वाला है पेंशन’
‘किसान मानधन योजना’ को ‘धन लुटो योजना’ बताते हुए हेमंत ने कहा कि, यह योजना को केवल गरीबों, किसानों का शोषण करने का एक माध्यम है. कहा कि योजना के तहत लोगों को कल से पेंशन नहीं मिलने जा रहा. बल्कि 60 वर्ष पूरे होने पर 3000 रूपये पेंशन दिया जाएगा.
लेकिन बीजेपी वालों ने जनता को ऐसा बताया, मानो की कल से ही जनता को पेंशन मिलने लगेगा. लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए अभी लोगों को 200 रूपये स्कीम में जमा करने होंगे. वही 18 वर्ष के युवाओं को 42 साल तक 55 रूपये जमा करना होगा. यह सोचना चाहिए कि 60 वर्ष बीतने पर इस 3,000 रूपये की क्या वेल्यू रह जाएगी.
उऩ्होंने कहा कि बीजेपी जैसे लुटरों की वजह से 60 वर्षों में नमक की कीमत ही 3,000 रूपये हो जाएगी. इस दौरान हेमंत सोरेन ने वसूले जा रहे ट्रैफिक शुल्क को टैक्स टेररिज्म का दर्जा दिया.
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