
Ranchi: कांके वधशाला में मीट दुकानदारों को अपने जानवरों को ले जाकर वहां कटवाने और इसके बाद अपने दुकानों में मीट बेचने के रांची नगर निगम के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. प्रतिवादियों की ओर से कोर्ट से रांची नगर निगम के आदेश पर लगी रोक को हटाने का आग्रह किया गया, जिसपर कोर्ट ने मामले की फाइनल सुनवाई के लिए 1 मई की तिथि निर्धारित की है. हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश कुमार की कोर्ट ने रांची नगर निगम के आदेश पर रोक जारी रखी है. रांची नगर निगम की ओर से प्रशांत कुमार सिंह ने पैरवी की.
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बता दें कि पूर्व की सुनवाई में रांची नगर निगम की ओर से बताया गया था कि वधशाला में जानवरों को काटने से पहले क्या प्रोसीजर होगा. उसका संकल्प तैयार कर गजट प्रकाशित करने के लिए राज्य सरकार को भेजा गया है. इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि कांके के वधशाला में मीट कटने के संबंध में उसका क्या स्टैंड है. इसे शपथ पत्र के माध्यम से दाखिल करने का निर्देश कोर्ट ने सरकार को दिया था. पूर्व में सुनवाई के दौरान निगम की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर कोर्ट को बताया गया था कि कांके स्थित वधशाला में जानवरों को काटने के पहले डॉक्टरों के द्वारा उनका चेकअप किया जाएगा,यह देखा जाएगा कि जानवरों को कोई बीमारी तो नहीं है। इससे लोगों को स्वच्छ मीट उपलब्ध होगा.
पूर्व की सुनवाई में कोर्ट को बताया गया था कि रांची नगर निगम ने एक आदेश निकाला है जिसके तहत सभी मीट दुकानदार कांके स्थित वधशाला में ही अपने जानवरों को काटने के लिए ले जाएंगे। ऐसा नहीं करने वाले दुकानदारों से 2 हजार जुर्माना वसूला जाएगा। पूर्व में कोर्ट ने रांची नगर निगम के इस आदेश पर रोक लगा दी है। दरअसल, कुरैशी पंचायत एंड शॉपकीपर वेलफेयर सोसाइटी की ओर से याचिका दाखिल कर कहा गया है कि कांके स्थिति वधशाला में जानवरों को काटने संबंधी नगर निगम के आदेश सही नहीं है, क्योंकि मीट दुकानदार उतनी दूर नहीं जा सकेंगे।




