
Hazaribag: बड़कागांव थाना से 29 सितम्बर 2019 को फरार हुए गैंगस्टर अमन साहू चतरा, हज़ारीबाग़ लातेहार और रामगढ़ में जमशेदपुर जेल में बंद गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के नाम पर लगातार अपराध और धमकी भरा फोन कर पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है.
उसकी गिरफ्तारी के लिए बिहार, बंगाल और नेपाल तक पुलिस की टीम गयी लेकिन अमन का सुराग नही लगा सकी है. इस दौरान सुजीत सिन्हा और अमन के दो दर्जन से अधिक गिरोह के लोग जरूर पकड़ लिये गये.
अमन साहू पुलिस की पकड़ से दूर बेखौफ होकर अपराध और घातक हथियारों के साथ सोशल मीडिया में भी सक्रिय है.
नये एसपी कार्तिक एस ने पदभार ग्रहण करने के बाद पूरे जिले की अपराध समीक्षा की और अमन के गुर्गे अभिषेक पांडेय को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बाद कहा है कि जल्द ही अमन साहू को गिरफ्तार कर लिया जायेगा.
उसके आपराधिक गिरोह पर लगाम लगाया जायेगा. इसके अलावे पुलिस की भूमिका और उसको मदद करने वाले सहयोगी की जांच होगी.
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अमन साहू का सहयोगी हुआ गिरफ्तार, रांची को बनाया था अपना ठिकाना
अपराधी अमन साहू के एक सहयोगी को हजारीबाग पुलिस ने शुक्रवार को उरीमारी थाना क्षेत्र के ठाकुर मोड़ से गिरफ्तार किया था.
गिरफ्तार अपराधी कुख्यात एवं भगोड़ा अमन साहू की गाइड लाइन पर क्षेत्र के एक उद्यमी से रंगदारी की रकम रिसीव करने पहुंचा था.
इसकी सूचना पुलिस को मिली और पुलिस टीम ने मौके से पहुंचकर उसे धर दबोचा. उसकी गिरफ्तारी एसपी कार्तिक एस की मॉनिटरिंग में पुलिस टीम ने की.
पकड़ा गया अपराधी अभिषेक पांडेय बिहार के भोजपुर जिला अंतर्गत नवादा थाना क्षेत्र के राम मोटर गली महाराजा हाता का रहने वाला है.
वर्तमान में उसने अपना ठिकाना रांची के बरियातू थाना अंतर्गत चेशायर होम रोड स्थित शिव शक्ति अपार्टमेंट में बना रखा था. जहां से आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने का काम करता था.
अमन की फरारी मामले की जांच से बच रही थी पुलिस, दारोगा को मिल रहा था संरक्षण
गैंगस्टर अमन साहू के बड़कागांव थाना से भागने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी मुकेश कुमार को सस्पेंड कर दिया गया था. अब तक संदेहास्पद नजर आ रहे इस मामले में गहरी साजिश रची जाने का शक पुख्ता तब होने लगा जब मात्र एक सप्ताह के अंदर सस्पेंड हुए दारोगा मुकेश कुमार को निलंबन मुक्त कर दिया गया था.
विधानसभा चुनाव से पूर्व मुकेश कुमार का तबादला गुमला जिला कर दिया गया था. लेकिन पुलिस ऑफिसर एसोसिएशन का उपाध्यक्ष होने के कारण मुकेश कुमार को इस आदेश के साथ हज़ारीबाग़ भेजा गया कि उनको किसी भी थाना/ओपी/अंचल में ड्यूटी नही देनी है, पुलिस लाइन में पदस्थापित रहेंगे.
बावजूद मुकेश कुमार को किसी थाना का प्रभारी बनाये जाने के लिए राजनीतिक और पुलिस के कुछ अधिकारी पैरवी कर रहे हैं.
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ऑडियो और मुकेश-अमन का वारंटी सहयोगी खोलेगा राज
सूत्रों की मानें तो अमन के फरारी प्रकरण में एक ऑडियो क्लिप है जिसके उजागर हो जाने के डर से पुलिस के तत्कालीन अफसर जांच और कार्रवाई से बच रहे थे.
उक्त ऑडियो क्लिप के सामने आ जाने से कई अधिकारियों की गर्दन फंस सकती है. कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं.
बताया जाता है कि उस ऑडियो में कैसे और किसके आदेश पर बिना किसी केस के अमन साहू को बड़कागांव थाना में रखा गया, बड़कागांव थाना में जब अमन की गिरफ्तारी हुई ही नही थी तो बड़कागांव थाना से फरारी का केस कैसे अमन साहू पर दर्ज हुआ और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक उसकी गिरफ्तारी जब उरीमारी में हुई तो बड़कागांव थाना में उसे क्यों और किसके आदेश पर लाकर रखा गया, जैसे महत्वपूर्ण सवालों के जवाब छुपे हुए हैं.
इसके अलावे अमन के बड़कागांव थाना में रखे जाने के दौरान तत्कालीन थानेदार मुकेश कुमार का करीबी और व्यवसायिक साझेदार बताया जाने वाला शख्स जो रामगढ़, लोहरदगा और हज़ारीबाग़ कोर्ट से नक्सल और डकैती मामले में जारी वारंटी और पुलिस की नजर में फरार वारंटी है, कैसे और क्यों बड़कागांव थाना जाकर अमन साहू की खातिरदारी में चिकेन-चाउमीन और फोन की सेवा उपलब्ध कराता था.
इसकी पुष्टि कॉल डिटेल और एरिया लोकेशन की जांच से हो सकती है. इसके साथ जमशेदपुर जेल में बंद गैंगस्टर सुजीत सिन्हा ने एसआइटी के साथ पूछताछ में उस वारन्टी नक्सली का नाम लेते हुए कहा था कि अमन साहू को 25 लाख में थाना से भगाया गया था और उसी ने अमन को भगाने में सब सेटिंग की थी. इसके बाद भी पुलिस आजतक उसपर हाथ डालने से बच रही है.
ऐसे हुई पुलिस की भूमिका संदिग्ध
29 सितम्बर 2019 को अमन साहू की फरारी के मामले में बड़कागांव थाना में जो मामला दर्ज हुआ उसके मुताबिक अमन शौच के लिए निकला और चौकीदार पर हमला कर भाग गया. इसमें संदेह का बिंदु यह है कि जब हाजत में ही शौचालय होता है तो उसको बाहर क्यों निकाला गया?
जब चौकीदार पर हमला किया तो उसने शोर क्यों नही किया? थाना में संतरी ड्यूटी लगी होती है तो वो क्या कर रहे थे? रात्रि में थाना का गेट बंद रहता है तो वह कैसे निकल गया? उसे किसी ने क्यों नहीं देखा? आदि ऐसे बिंदुओं पर पुलिस की भूमिका संदिग्ध है.
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