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लातेहार:  परिवार के पास नहीं है राशन कार्ड, मां ने कहा निम्मी की मौत भूख से हुई, प्रशासन मौत की बीमारी बता रहा

Latehar :  लातेहार जिला के मनिका प्रखंड के हिसातू गांव निवासी जुगलाल भुइयां के 8 बच्चे हैं. जुगलाल भुइयां की 6 वर्ष की बच्ची निम्मी की मौत रविवार को चार बजे हो गई.

जुगलाल भुइयां अपने दो बच्चों के साथ लातेहार में संचालित एक भट्ठे में मजदूरी का काम करता है. घर पर पत्नी और पांच बच्चे रहते हैं. इस परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है. जबकि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है.

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परिवार के सदस्य लॉकडाउन में आर्थिक तंगी झेल रहे हैं. सूचना के अनुसार परिवार को किसी तरह की कोई मदद नहीं मिली. न तो मुखिया ने ही अनाज दिया और न ही डीलर ने. बच्ची की मौत भूख से हुई है या बीमारी से यह तो जांच का विषय है.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि गरीबी के चरम पर रहने के बावजूद इस परिवार को लॉकडाउन की इस विकट स्थिति में किसी प्रकार की सरकारी सहायता नहीं मिली.

मृतक बच्ची की मां मानती भूईया का कहना है कि बेटी की मौत भूख से हो गई. घर में खाने के लिए एक दाना भी नहीं था. हालांकि प्रशासन ने बच्ची की मौत की वजह बीमारी बताई है.

लॉकडाउन के कारण नहीं मिल रही मजदूरी

जुगलाल ने कहा कि वह भट्ठा में काम नहीं मिल रहा है. राशन कार्ड भी नहीं है. जहां काम करते हैं वहां से मजदूरी नहीं मिली. जिस कारण अनाज नहीं खरीद सके. उसने बताया कि लॉकडाउन के कारण वह घर भी नहीं पहुंच सका. बच्ची की मौत की खबर मिलने के बाद वह घर पहुंचा.

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2 दिन से नहीं बना था खाना

जुगलाल की पत्नी मानती ने कहा कि घर में अनाज नहीं रहने के कारण 2 दिनों से खाना नहीं बना था. बच्चे भूखे थे. जिसके कारण उनकी 5 वर्षीय बेटी निम्मी की तबीयत बिगड़ गई. और उसकी मौत हो गई. उसने बताया कि आसपास के लोग कुछ दे देते थे तो घर में खाना बना लेती थी.

प्रोफेसर ज्यां द्रेज का दावा- भूख से हुई बच्ची की मौत

घटना की जानकारी मिलने के बाद अर्थशास्त्री ज्यांद्रेज पीड़ित के गांव पहुंचे. मामले की छानबीन की. उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला के घर की स्थिति को देखकर और इनके पड़ोस के लोगों से मिलकर जानकारी ली. इसके अनुसार स्पष्ट होता है कि बच्ची की मौत भूख से हुई है. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार सिर्फ कोरी भाषणबाजी कर रहे हैं. गरीबों तक राशन नहीं पहुंचना काफी दुखद है.

सामाजिक कार्यकर्ता पी सिंह कहते हैं परिवार के पास भोजन के लिए अनाज नहीं था. परिवार को कहीं से लॉकडाउन की अवधि में राशन नहीं मिला. मुख्यमंत्री दीदी किचन योजना भी पंचायत में नहीं है. जब प्रशासन को इसकी सूचना मिली तो जुगलाल के घर पांच पैकेट राशन और पांच हजार रुपया दिया गया.

क्या कहते हैं अधिकारी

मनिका अंचल अधिकारी नंद कुमार राम ने न्यूजविंग को बताया कि भूख से मौत की कथित सूचना मिलने के बाद प्रशासन की टीम उनके घर गई. मामले की जांच की गयी. मृतक की मां के बयान के अनुसार उसके घर में सुबह खाना बना थाय दोपहर में भी बच्चे खाना खाए थे. दिन में बच्ची को बुखार आ गया था. पड़ोसी सीमा देवी ने बताया कि बच्ची को सुबह उल्टी हुई. जिसकी सूचना उसकी मां ने नहीं दी. बच्ची की भूख से मौत नहीं हुई है. यह परिवार गांव में काफी कम रहता है. इस कारण से परिवार का राशन कार्ड नहीं बना है. पीड़ित परिवार का राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है.

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