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#WorldHypertensionDay : 50 फीसदी लोग नहीं जानते कि उन्हें है बीपी की शिकायत, 35 वर्ष के बाद रूटीन जांच जरूरी

Ranchi: भारत के अधिकतर लोग हाइपरटेंशन की समस्या से पीड़ित हैं. हाइपरटेंशन के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होने के कारण 50 फीसदी लोगों को पता ही नहीं चलता कि वे भी पीड़ित हैं.

रिम्स के कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ प्रशांत ने  बताया कि हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर हृदय से जुड़ी एक आम बीमारी है. उन्होंने बताया कि 90 प्रतिशत मामलों में यह जेनेटिकल होता है. अन्य दस प्रतिशत में कई अन्य वजहें भी होती हैं.

उन्होंने बताया कि चक्कर आना, कमजोरी लगना एक लक्षण हैं. पर, इसके अलावा कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता. परिवार में अगर किसी को बीपी की शिकायत रही है तो 35 वर्ष के बाद जांच कराते रहना चाहिए.

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बीपी रीडिंग में लगातार 140/90 से अधिक रहने पर किसी कॉर्डियोलॉजिस्ट से संपर्क करना जरूरी है.

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क्या है बीमारी के प्रमुख कारण

बीपी की बीमारी अधिकतर मामलों में जेनेटिकल होती है. इसके प्रमुख बेतरतीब लाइफस्टाइल, तनाव और अत्यधिक मोटापा भी हो सकता है.

बढ़ती उम्र, नमक का ज्यादा सेवन, शुगर जैसी स्थिति में भी हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ जाता है. महिलाओं की तुलना में पुरुषों को हाइपरटेंशन की शिकायत अधिक होती है.

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डॉ प्रशांत ने बताया कि इंडिया हार्ट स्टडी की रिपोर्ट कहती है कि देश में हाइपरटेंशन का गलत इलाज अनुमान से कहीं अधिक होता है.

इसका सबसे बड़ा नुकसान गंभीर रूप से हाइपरटेंशन के शिकार रोगियों को भुगतना पड़ता है. हाई ब्लड प्रेशर हार्ट से संबंधित रोग और स्ट्रोक का सबसे आम कारण है.

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जीवनशैली में बदलाव कर बचा जा सकता है

हाइपरटेंशन पूरी तरह ठीक नहीं हो सकता. लेकिन एंटी हाइपरटेंशन दवाओं, स्वस्थ जीवनशैली तथा आहार संबंधी आदतों के साथ इसे मैनेज किया जा सकता है.

डॉक्टर ने बताया कि हाइपरटेंशन से बचने के लिए बीटा ब्लॉकर्स, एसीई इन्हीबिटर जैसी ड्रग्स दी जाती है. इसके अलावा धूम्रपान छोड़ने,वजन घटाने, तनाव कम करने और नियमित व्यायाम को जीवनशैली में शामिल करने से इससे बचा जा सकता है.

बीपी की समस्या से पीड़ित है तो लगातार मेडिकल सपोर्ट लेना जरूरी है. सही समय पर पता चलने और जरूरी उपचार मिलने से बेहतर जीवन व्यतीत किया जा सकता है.

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