
NewDelhi : 2002 के गुजरात दंगों के दौरान गैंगरेप की शिकार बिलकिस बानो को गुजरात सरकार दो सप्ताह के भीतर 50 लाख रुपये मुआवजा दे. साथ ही सरकारी नौकरी और आवास दिया जाये. बिलकिस बानो की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए Supreme Court ने गुजरात सरकार को यह आदेश दिया है.
खबरों केअनुसार दंगों के दौरान अहमदाबाद के नजदीक हिंसक भीड़ ने पांच महीने की गर्भवती बिलकिस बानो से गैंगरेप किया और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी. जान लें कि बिलकिस बानो की ओर से कहा गया है कि अभी तक सरकार ने कुछ नहीं दिया है.
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सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस वालों पर कार्रवाई पर मुहर लगा दी थी
सुप्रीम कोर्ट ने इसी साल अप्रैल माह में भी गुजरात सरकार को दंगा मामले की पीड़िता बिलकिस बानो को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिये थे. इस क्रम में Supreme Court ने सरकारी नौकरी और आवास देने को भी कहा था.
गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि दोषी अधिकारियों, जिन्होंने बिलकिस गैंगरेप मामले में सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की, उनमें से कई को पूरे पेंशन लाभ से हटा दिया गया है. साथ ही एक आईपीएस अधिकारी को दो रैंकों में डिमोट किया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस वालों पर कार्रवाई पर मुहर लगा दी थी.
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परिवार के सात सदस्यों की हत्या की गयी थी
दरअसल, बिलकिस बानों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दायर कर कहा था कि इस केस में उसे और भी मुआवजा दिलाया जाये. साथ ही कहा गया कि जिन चार पुलिसवालों व दो डॉक्टरों को हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया था, उनकी जानकारी के अनुसार उन्हें सरकार ने वापस काम पर रख लिया था. कोर्ट ने गुजरात सरकार से जवाब मांगने के साथ ही बिलकिस को कहा था कि वह मुआवजे के लिए अलग से याचिका दाखिल करे.
गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुए दंगों के दौरान बिल्कीस बानो बलात्कार कांड और उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या मामले में विशेष अदालत ने 21 जनवरी, 2008 को 11 आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी जबकि पुलिसकर्मियों और चिकित्सकों सहित सात आरोपियों को बरी कर दिया था.
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