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Jamshedpur : झारखंड युवा सदन में उठे ग्रामीणों के विकास और बेरोजगारी के मुद्दे, राज्य में स्टार्टअप प्रमोशन बिल लाने पर चर्चा

Jamshedpur : झारखंड युवा सदन में जमशेदपुर के दो युवा बतौर विधायक समस्याओं को रख रहे है. रविवार को युवा सदन में झारखंड स्टार्टअप प्रमोशन बिल पर भी चर्चा हुई जिसमें पक्ष-विपक्ष ने अपने विचार रखे. विधानसभा मे पक्ष के नेता रोहन श्रीवास्तव ने सदन मे स्टार्टअप बिल का समर्थन करते हुए कहा बिल पेश करने का मुख्य उद्देश्य झारखंड ग्रीन इंडस्ट्री को बढ़ावा देना है. आज झारखंड एक इंडस्ट्रीयल पावर है. यहां सीमेंट की फैक्ट्री से लेकर छोटे बड़े इंडस्ट्रीयल प्लांट है पर झारखंड आईटी सेक्टर में काफी पीछे है. आईटी सेक्टर को बढ़ावा मिलने से काफी एमएनसी झारखंड में निवेश करेगी जिससे झारखंड के युवा न केवल जॉब गेनर बनेंगे बल्कि जॉब प्रोवाइडर भी बनेंगे.

रोहन ने विपक्ष पर बरसते हुए प्रश्न किया की झारखंड राज्य को बने 22 वर्ष हो चुके हैं उसके बाद भी झारखंड अत्यंत पिछड़े राज्य के सूची मे क्यूं आती है, आखिर ऐसी क्या समस्या है कि जो भी व्यापारी उद्योग को प्रारंभ करता है उसे दो तीन सालों से ज्यादा नही चला पाता. झारखंड के युवा नौकरी पेशे के राज्य से पलायन कर रहे और दूसरे राज्य को संपन्न बना रहे हैं. स्टार्टअप के मुद्दे पर उद्योग लगाने पर विपक्ष के सवाल में प्रदूषण होने का मुद्दा उठा जिस पर हर्ष रवानी जी ने बताया कि एनजीटी (National Green Tribunal) पार्लियामेंट्री एक्ट 2010 एक विशेष अदालत है जो कि Environment Protection Act के तहत प्रदूषण नियंत्रण कानून बनाया गया है. इसके तहत जो भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा उनके द्वारा भरपाई करने एवं दंड का प्रावधान है. वहीं सदन में चाईबासा विधानसभा से बतौर विधायक शुभम ने बेरोजगारी की समस्या और समाधान के मुद्दे साथ ही ग्रामीण स्वरोजगार के विषय को भी गंभीरता से रखा. शुभम ने विपक्ष के लोगों से आग्रह किया कि आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति से ऊपर उठ कर विकास को गति देने के लिए विपक्ष के लोगों के बातों को गंभीरता से सुना जाए और संशोधन किया जाए.

शुभम ने अपने सरकार से कहा कि ग्रामीणों को पारंपरिक कामों से जोड़ने के लिए बिल में प्रावधान किया जाए जिससे साल पत्ता से दोना प्लेट, , तसर, मधुमक्खी पालन, बांस की फर्नीचर आदि कार्य करने वाले लोगों को पेपर पेन में न उलझाया जाए. ग्राम सभा द्वारा उन्हें चिन्हित कर सीधे लाभ से जोड़ा जाए. सरकारी ऑफिस का चक्कर न लगवाया जाए. जो शहरी लोग है उनको स्टार्टअप पॉलिसी समझ आएगी और वो लाभ लेंगे परन्तु गांव के भोले भाले लोग इतने अध्यय वाले योजना का लाभ नहीं ले पाएंगे इसलिए योजना ऐसा बने जो सीधे ग्रामीण को मिले और उनका विकास हो.

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