
PRAVIN KUMAR
Ranchi: राजमहल सीट पर मोदी लहर हावी नहीं हो पाया. अल्पसंख्यक वोटरों की एकजुटता के कारण विजय हांसदा को विराट जीत मिली. इस क्षेत्र में डबल इंजन वाली सरकार का कामकाज हार के रूप में सामने आया. एक और जहां कांग्रेस के दिग्गज नेता थॉमस हांसदा के पुत्र होने के नाते विरासत में मिली राजनीति और पहचान को विजय हंसदा ने कायम रखा वहीं, इस सीट पर जीत का अंतर को बढ़ने में भी कामयाबी मिली.
उन्होंने बीजेपी के हेमलाल मुर्मू को 99 हजार 195 वोटों से हराया है. छह विधानसभा क्षेत्र में फैले राजमहल सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र में साहिबगंज व पाकुड़ जिले के कुल 15 प्रखंड हैं. गोड्डा जिले के दो बोआरीजोर व सुंदरपहाड़ी एवं दुमका जिले का गोपीकांदर प्रखंड आता है.
राजमहल सुरक्षित लोकसभा क्षेत्र शुरू से ही संताल की राजनीति का केंद्र रहा है. पूर्व में कांग्रेस का मजबूत आधार होने के बाद भी झामुमो का मजबूत आधार रहा है. हालांकि इस सीट पर भाजपा के देवीधान बेसरा 2009 का चुनाव जीतने में कामयाब हुए थे.
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हांसदा की जीत का समीकरण क्या रहा
बरहेट के अनुप मुमू कहते हैं, रघुवर सरकार की नीतियां, सीएनटी-एसपीटी एक्ट संशोधन स्थानीयता नीति धर्म स्वतंत्रता विधायक, पेशा कानून, अडानी पावर प्लांट को किसानों की जमीन जबरन देना, भूमि अधिग्रहण कानून, वन क्षेत्र से आदिवासियों की बेदखली जैसे मुद्दे हैं, जो सता पक्ष के विरोध में गये.
साथ ही ईसाई और मुस्लिम ने भाजपा के विरोध में वोट किया. अब तक इस इलाके में जेएमएम को जीतने के लिए संताल समुदाय वोट करता था लेकिन इस बार भाजपा को हराने के लिए वोट किया.
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क्या कहते हैं मतदाता
महेशपुर के राजीव भगत कहते हैं, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, बरहेट विधानसभा में किसी भी उम्मीदवार की जीत हार में ईसाई वोट निर्णायक होता है. वही महेशपुर, पाकुड़, राजमहल विधासभा का गांगा से सटा हुआ क्षेत्र मुस्लिम बहुल इलाका है. जहां मुस्लिम समुदाय जीत हार के लिए निर्णायक होता है.
साथ ही राजमहल लोकसभा सीट पर कुल वोटर का एक बड़ा हिस्सा जो 15 प्रतिशत के आसपास है वह पुरी तरह झामुमो के साथ गया. झामुमो की जीत के बाद भी हेंमत के विधानसभा से 2014 के मुकबले बढ़त में 7000 हजार कम मिले.
राजमहल लोकसभा की बनावट
राजमहल लोकसभा में छ: विधानसभा हैं. इसमें राजमहल, बोरियो से भाजपा, वहीं बरहेट, शिकारीपाड़ा, महेशपुर झामुमो के पास जबकि पाकुड़ विधानसभा सीट कांग्रेस के पास है. लोकसभा चुनाव में भाजपा विधायक ताला मरांडी सक्रिय नहीं रहे जिस कारण संताल समुदाय के वोटों पर बुरा असर हुआ. साथ ही बोरियो विधानसभा क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन की संभावना के बावजूद भाजपा कार्यकर्ताओं में बेहतर समन्वय का अभाव रहा.
वहीं भाजपा उम्मीदवार हेमलाल मुर्मू के व्यवहार के कारण कई जमीनी कार्यकता इनके साथ होने से बचे जो विजय हांसदा को विजयी बनाने में सहायक हुआ. वहीं भाजपा पाकुड़ विधानसभा में ही बढ़त बना सकी. विजय हंसदा ने पांच विधासभा में बढ़त बनायी लेकिन झामुमो कार्यकारी अध्यक्ष के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में जहां से हेमंत सोरेन विधायक हैं 2014 में बढ़त 20,000 से अधिक थी. वहीं 2019 के चुनाव में यह बढ़त मात्र 13000 के करीब रही.
मोदी लहर के बावजूद भाजपा की हार का अंतर बढ़ा
राजमहल लोकसभा सीट पर धार्मिक ध्रुवीकरण ने जहां विजय हांसदा को जीत दिलायी वहीं कांग्रेस के आलमगीर आलम, झाविमो के मिस्त्री सोरेन, राजमहल के कांग्रेस नेता बजरंगी यादव जैसे लोगों ने विजय हांसद की जीत के लिए खूब पसीना बहाया. धार्मिक संगठनों के युवा समूह ने भी बूथ प्रबंधन से लेकर वोटरो को बूथ तक लाने का काम किया.
महेशपुर विधानसभा के धमालपड़ा, साहहिब, कनीघड़ा, खगड़ा, अबुआ जैसे बूथों पर बीजेपी के चुनाव एजेंट तक नजर नहीं आये. महेशपुर विधानसभा के सोनाजोड़ी रानीघर लिट्टीपाड़ा प्रखंड के कई बुथो पर भी भाजपा के चुनाव एजेंट नदारद रहे जिसका फायदा विजय हांसदा को मिला.
राजमहल में नहीं चल पाया मिस्फिका हसन का जादू
भारतीय जनता पार्टी ने पाकुड़ के एक मुखिया को भाजपा में शामिल किया. रघुवर सरकार के द्वारा इन्हे बॉडीगार्ड भी उपलब्ध कराया गया. हालांकि मीडिया में खबर आने के बाद बॉडीगार्ड वापस ले लिये गये. बाद में मिसफिका को भाजपा का प्रदेश प्रवक्ता भी बनाया गया. इसके बाद भी मुस्लिम मतों को अपने पले में भाजपा लाने में वो सफल नहीं हो सकी.
राजनीति के जानकार बताते हैं कि असल में राजमहल सीट पर आमने-सामने के मुकाबले में भाजपा की राह हमेशा मुश्किल रही है. इससे भाजपा विरोधी वोटों का झामुमो के पक्ष में धु्रवीकरण हो जाना ही हेमलाल की हार की एक बड़ी वजह मानी जा रही है.
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| राजमहाल | भाजपा ( 80,262) | झामुमो (103,062) |
| बोरियो | भाजपा ( 65,307) | झामुमो (76,301) |
| बरहेट | भाजपा ( 49,299) | झामुमो (62,921) |
| लिटटीपाडा | भाजपा ( 55,035) | झामुमो (71,504) |
| पाकुड़ | भाजपा ( 125,966) | झामुमो (76,711) |
| महेशपुर | भाजपा ( 58,212) | झामुमो (189,635) |




