
Deoghar: रविवार को केंद्र व प्रदेश नेतृत्व द्वारा निर्देशित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जुलाई महीना को मोटा अनाज माह मना रही है. इसी सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी जुलाई माह में देश में मोटा अनाज के बारे में जागरूकता अभियान चला रही है. आज भारतीय जनता पार्टी देवघर जिला की महिलाओं ने कृषक जो मोटे अनाज की खेती करते हैं उन्हें सम्मानित करने का काम किया गया. इसके अलावा दर्दमारा के साईं इंटीग्रेटेड एग्रो फार्म हाउस में उनके संस्थापक दीपक कुमार सिंह और उनकी धर्मपत्नी शंकरी देवी से भाजपा की महिलाए मिली. शंकरी देवी झारखंड सरकार द्वारा इजराइल से कम पानी में खेती का प्रशिक्षण लेकर आई हुई है और यहां खेती कर भी रही है. उनके यहां मोटे अनाज का पहले से ही खेती हो रहा है. महिला मोर्चा की बहनों अंग वस्त्र देकर दोनों पति-पत्नी को सम्मानित किया. देवघर के गुड्डू बरनवाल और उनकी धर्मपत्नी पूजा देवी जो कोरोना काल में भी मोटे अनाज को घर में उसका भुजा हो सत्तू हो आटा हो लोगों के घर घर तक पहुंचाई. कोरोना काल में भी घर में स्वच्छ सत्तू, मिक्स आटा, बेसन, महुआ, गेहूं, चना, बाजरा के आटा घर घर तक पहुंचाते थे. चने की सत्तू, जौ की सत्तू, मडुआ का आटा, बाजरे की आटा अभी जो हम सभी मिक्स आटा खाते हैं. वह आटे सस्ते और शुद्ध भाव में घर-घर तक पहुंचाती हैं. उनको भी महिला मोर्चा की बहनें सम्मानित की. मौके पर मुख्य अतिथि सह भाजपा महिला मोर्चा की जिला प्रभारी रीता चौरसिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर देश में मोटे अनाजों को भोजन का मुख्य अंग बनाने पर है. मोटे अनाज को महत्व दिलाने के लिए मोदी सरकार ने वर्ष 2018 में मोटा अनाज वर्ष घोषित किया था. अब भारत के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को ‘अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है. कोरोना के बाद मोटे अनाज इम्युनिटी बूस्टर के रूप में प्रतिष्ठित हुए हैं. इन्हें सुपर फूड कहा जाने लगा है. मिलेट्स को सुपर फूड कहा जा रहा है. सुपर फूड उन खाद्य सामग्रियों को कहा जाता है जिनमें पोषक तत्व अपेक्षाकृत रूप से ज़्यादा होते हैं. मिलेट्स को भी ऐसी ही फसलों में गिना जाता है. मोटे अनाज वाली फसलों में ज्वार, बाजरा, रागी, सावां, कंगनी, चीना, कोदो, कुटकी और कुट्टू फसलें आती हैं. भारतीय मिलेट्स अनुसंधान संस्थान के अनुसार, रागी यानी फिंगर मिलेट में कैल्शियम की मात्रा अच्छी होती है. प्रति 100 ग्राम फिंगर मिलेट में 364 मिलिग्राम तक कैल्शियम होता है. रागी में आयरन की मात्रा भी गेहूं और चावल से ज्यादा होती है. उन्होंने कहा कि मिलेट्स क्रॉप को कम पानी की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए गन्ने के पौधे को पकाने में 2100 मिलीमीटर पानी की ज़रूरत होती है. वहीं, बाजरा जैसी मोटे अनाज की फसल के एक पौधे को पूरे जीवनकाल में 350 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है. रागी को 350 मिलीमीटर पानी की आवश्यकता होती है तो ज्वार को 400 मिलीमीटर पानी चाहिए होता है. जहां दूसरी फसलें पानी की कमी होने पर पूरी तरह बर्बाद हो जाती हैं. वहीं, मोटा अनाज की फसल ख़राब होने की स्थिति में भी पशुओं के चारे के काम आ सकती हैं. ये फसलें इस लिहाज़ से भी अच्छी होती हैं क्योंकि जहां धान उगाने में काफ़ी ज़्यादा मेहनत लगती है. वहीं बाजरा और ज्वार जैसी फसलें बहुत कम मेहनत में तैयार हो जाती है. इसके साथ ही मोटे अनाज वाली फसलों में रसायनिक उर्वरक और कीटनाशकों का प्रयोग भी बहुत कम होता है. इन फसलों के अवशेष पशुओं के चारे के काम आते हैं, इसलिए इनको धान की पराली की तरह जलाना पड़ता और पर्यावरण प्रदूषण नहीं फैलता है. यह
कुपोषण समाप्त करने के केंद्र सरकार दशकों से करोड़ों रुपये खर्च कर रही है. कुपोषण से लड़ने में भी मिलेट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. ये प्रोटीन के साथ-साथ एनर्जी से भी भरे होते हैं. मोटे अनाज सस्ते भी हैं. मोटे अनाजों में गेहूं और चावल की तुलना में ज़्यादा एंजाइम, विटामिन और मिनरल पाए जाते हैं. इनमें सॉल्युबल और इन-सॉल्युबल फाइबर भी ज़्यादा पाया जाता है. साथ ही इनमें मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों का बहुत अच्छा मिश्रण होता है. मोटे अनाज अगर एक ग़रीब आदमी खाएगा तो उसे कुपोषण से बचाव मिलेगा और एक समृद्ध व्यक्ति खाएगा तो उसे पोषक तत्व मिलेंगे. कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सह देवघर महिला मोर्चा की जिला की प्रभारी रीता चौरसिया, महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष विजया सिंह, जिला कार्यसमिति सदस्य कुसुम सिंह, महिला मोर्चा मीडिया प्रभारी संध्या कुमारी, बबलू कुमार, गणेश राय मुख्य रूप से उपस्थित थे.




