
- जुलाई से पहले हो जाये निरस्त दावों का निष्पादन
Ranchi : राज्यवासियों के परंपरागत वन अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामीणों ने शनिवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया. धरना वन अधिकार रक्षा मंच की ओर से दिया गया, जिसमें गांवों और वनों से संबंधित अधिकार ग्राम सभा को देने की मांग की गयी. मंच के सदस्य फादर जॉर्ज मोनोपल्ली ने बताया कि ग्राम सभाओं को गांवों और वन संपदाओं पर अधिकार नहीं होने के कारण वन अधिकार कानून का उल्लंघन हो रहा है. अब तक राज्य में जितने भी वन पट्टों को निरस्त किया गया है, वे सभी वन अधिकार कानून की अनदेखी कर निरस्त किये गये हैं. जिला स्तरीय वन अधिकार समिति ने भी इन कानूनों की अनदेखी की है. जो वन पट्टा निर्गत किया गया है, वह भी दावित वन क्षेत्र में बिना किसी वजह के कटौती करके कम क्षेत्र को निर्गत किया गया है. इस धरना में गुमला, पलामू, लातेहार, चतरा समेत विभिन्न जिलों से वनाश्रित शामिल हुए थे.
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ग्राम सभा को मिले पूर्ण अधिकार
फादर जॉर्ज ने कहा कि 13 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और उसके बाद पुनः इस निर्णय को 28 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की ओर से चार माह के लिए वनाश्रितों को वन क्षेत्रों से हटाने के निर्णय को स्थगित करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे अच्छा है कि सरकार वन अधिकार कानून 2006 का पालन करते हुए अधिकार ग्राम सभा को दे. सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश को स्थगित करने से अच्छा है कि ग्राम सभा को सारी शक्तियां दे दी जायें.
अनुमंडल और जिला स्तरीय समितियां नहीं मानतीं ग्राम सभा को
प्रेमचंद मुर्मू ने कहा कि राज्य में सिर्फ वन अधिकार कानून 2006 का ही उल्लंघन नहीं हुआ है, बल्कि कई अन्य कानूनों का भी उल्लंघन हो रहा है. वह भी सिर्फ इसलिए, क्योंकि अनुमंडल और जिला स्तर की समितियों द्वारा ग्राम सभा के अधिकारों को माना नहीं जाता. वन और राजस्वकर्मी दावों के भौतिक सत्यापन में सहयोग नहीं करते. उन्होंने कहा कि इन सबके बीच गरीब वनाश्रित परेशान होते हैं, क्योंकि इनके पास रहने के लिए सिर्फ वन ही होता है.
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ये हैं मांगें
जिला स्तर पर निरस्त दावों पर ग्राम सभा की अनुमति ली जाये, सभी निरस्त दावों पर पुनर्विचार ग्राम सभा स्तर पर हो, ग्राम सभा के निर्णय का सरकारी कर्मचारी सम्मान करें, ग्राम सभा, अनुमंडल स्तरीय समिति और जिला स्तरीय समिति के पास लंबित सभी वन अधिकार दावे जुलाई तक निपटाये जायें.
ये संगठन हुए शामिल
धरना-प्रदर्शन में एकता परिषद, केंद्रीय सरना समिति, झारखंड जंगल बचाओ आंदोलन, झारखंड विकास मोर्चा, कांग्रेस पार्टी, सीपीआई माले समेत अन्य पार्टियों का सहयोग मिला. इसमें मुख्य रूप से दयामनी बरला, शुभेंदु सेन, अजयनाथ शाहदेव, शोभा यादव समेत अन्य उपस्थित थे.
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