
Ranchi : प्रदेश भाजपा ने ठकुरानी माइंस के आयरन ओर की नीलामी पर सवाल उठाया है. इस खदान में 101723.6 टन लौह अयस्क लंप्स और फाइंस की ई-नीलामी के लिये टेंडर जारी हो चुका है. झारखंड राज्य खनिज विकास निगम ने 8 जून को निविदा जारी की है. प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि झारखंड खनिज संपदा से परिपूर्ण राज्य है. राज्य के साथ-साथ देश के आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम है. इसका सदुपयोग किये जाने की बजाये तस्करी हो रही. वर्तमान में जबसे यूपीए सरकार राज्य में है, संपदा की लूट बढ़ी है. बालू, कोयला, आय़रन की लूट की छूट राज्य में है.
इसके पीछे मास्टरमाइंड कांग्रेस है. ठकुरानी माइंस के आयरन ओर की ग्रेडिंग में हेराफेरी की गयी है. इससे नीलामी के बाद सरकार को करोड़ों की क्षति होगी. इस लूट को रोका जाना चाहिये. राज्यपाल से भी इस माइंस की नीलामी में गड़बड़ियों को रोकने का आग्रह किया गया है.
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12 घंटे से कम समय में हो गयी टेस्टिंग
दीपक प्रकाश के मुताबिक पश्चिमी सिंहभूम के 84.6 एकड़ में ठकुरानी माइंस में आयरन ओर का पट्टा पवन कुमार जैन को दिया गया था. 2019 में राज्य सरकार ने इस खदान की लीज रद्द कर दी थी. इससे पहले 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने 347 खदानों पर अनुमति से ज्यादा खनन करने पर जुर्माना लगाने को कहा था. जैन पर भी 334.47 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इस बीच सरकार ने इस खदान की लीज रद्द कर बंद करने का आदेश दिया. कोर्ट ने तब जुर्माने की रकम वसूलने को पूर्व से बचे स्टॉक को बेचने को कहा. इसके बाद खेल शुरू हुआ.
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आयरन ओर की ग्रेडिंग के लिये राज्य खनिज विकास निगम ने हजारीबाग लैब में इसका सैंपल 30.5.2021 (रविवार) को भेजा. 12 घंटे से भी कम समय में रिपोर्ट आ गयी जो संदिग्ध है. इस टेस्टिंग में लंबा समय लगता है. जल्दबाजी में किये गये टेस्टिंग में मिनरल कारपोरेशन को रिपोर्ट में कहा गया कि इसकी ग्रेडिंग 35 से 50 प्रतिशत तक रखा जाए. जबकि पूर्व लीजधारक पवन कुमार जैन ने आइबीएम को 60-65 प्रतिशत तक आयरन ओर की जानकारी दी थी.
खनन विभाग (झारखंड सरकार) ने भी बाद में इसे 64 प्रतिशत तक दिखाया. यहां तक कि 2020 में डीसी ने भी अपनी रिपोर्ट में 65 प्रतिशत आयरन ओर की जानकारी दी थी. ऐसे में खनिज विकास निगम की फरेबी ग्रेडिंग रिपोर्ट से होने वाली नीलामी से करोड़ो की क्षति होगी. 101723.6 टन लौह अयस्क की नीलामी से कम से कम 40 करोड़ रुपये का नुकसान होगा. झारखंड स्टेट मिनरल कॉरपोरेशन द्वारा जो माल बेचा जायेगा, वो कम दाम में बिकेगा. इसमें स्थानीय डीएमओ, निदेशक (खान) की मिलीभगत है. साथ ही मामले में राजनीतिक संरक्षण भी है.
400 करोड़ का लगेगा चूना
ठकुरानी माइंस की नीलामी के कारण ना सिर्फ कम राजस्व मिलेगा, बल्कि राज्य में अवैध माइनिंग भी बढेगी. राज्य में कई आयरन ओर बंद हैं. उनका फिर से ऑक्शन होना है. ऐसे में मिनरल कारपोरेशन द्वारा जो माल बेचा जायेगा, उसी आधार पर राज्य को पैसे मिलेंगे. नीलामी में कम पैसे मिलने से 300-400 करोड़ तक का चूना सरकार को लगेगा. आने वाले समय में भाजपा लूट की छूट को रोकने को संपदा के रखवाले के तौर पर आंदोलन करेगी.
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