
Ranchi: कृषि संबंधी तीनों नये कानूनों को रद्द करने, एमएसपी का कानून बनाने, स्वामीनाथन कमीशन की अनुशंसाओं को लागू करने, गैरमजरूआ जमीन की रसीद काटना प्रारंभ करने के सवाल के साथ-साथ कल-कारखाने और सार्वजनिक क्षेत्र को निजीकरण करने, बढ़ती महंगाई और झारखंड में विस्थापन के खिलाफ भाकपा व अन्य जनसंगठनों ने आज संयुक्त रूप से बिगुल फूंका.
इस संबंध में फैसला भाकपा राज्य कार्यालय में किसान नेता के.डी सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में लिया गया. बैठक में पार्टी के अलावा एटक, किसान सभा, एआईवाईएफ, एआईएसएफ, महिला समाज के नेताओं ने भाग लिया.
बैठक को संबोधित करते हुए पार्टी के राष्ट्रीय सचिव सह एटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेन्द्र कुमार ने कहा कि देश में चल रहा किसान आंदोलन वर्ग संघर्ष है. इन किसानों की मांगों को मोदी सरकार नहीं मान रही है. यही फासिज्म है. उन्होंने कहा कि आज जनतंत्र खतरे में है. ट्रेड यूनियन इसी समझ के तहत किसानों के आंदोलन को सहयोग करेगा और मजदूर को भी किसानों को सहयोग करना चाहिए.
पार्टी के राज्य सचिव भुवनेश्वर प्रसाद मेहता ने कहा कि झारखंड के किसान व मजदूरों तथा आम अवाम को बदहाली से बाहर निकालने के लिए पार्टी पूरे राज्य में आंदोलन करेगी. इस आंदोलन को सभी संगठन मजबूत करेंगे. उन्होंने कहा कि 17 मई को रांची के मोरहाबादी मैदान में एक विशाल रैली की जायेगी.
इस रैली से पहले पंचायत से लेकर जिला स्तर तक कार्यक्रम बनाया जाएगा. सभी जिला में पर्चा निकाला जाएगा. इस बैठक में मुख्य रूप से राजेन्द्र यादव, महेंद्र पाठक, पीके पांडेय, अजय कुमार सिंह, सुशील स्वतंत्र, उमेश नजीर, मिथिलेश दांगी, कलाम रशीदी सहित कई लोग उपस्थित थे.




