
Giridih: गिरिडीह से भाजपा के सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय का इस बार चुनाव जीतना बहुत ही मुश्किल होने वाला है. लगातार पांच बार से गिरिडीह लोकसभा का चुनाव जीतने वाले सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय को जहां एक ओर अपनी ही पार्टी के नेताओं के विरोध का सामना करना पड़ रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इस बार एकजुट होकर गिरिडीह सीट झटकने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है.
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आंकड़ें भाजपा सांसद के खिलाफ

2014 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा के उम्मीदवार रवीन्द्र कुमार पांडेय की स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. जनता में सांसद के खिलाफ आक्रोश था. लेकिन मोदी लहर में सांसद पाण्डेय की वैतरणी किसी तरह पार हो गई. लेकिन उस मोदी लहर में भी झामुमो के उम्मीदवार और डुमरी विधायक जगन्नाथ महतो ने उन्हें कड़ी टक्कर दी थी.
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जहां भाजपा के रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने चुनाव में कुल 3,91,905 वोट पाकर विजय हासिल की, वहीं झामुमो के जगन्नाथ महतो ने अकेले दम पर कुल 3,51,600 वोट लाकर भाजपा उम्मीदवार को नाको तले चने चबवा दिए थे. झामुमो के इस प्रदर्शन ने सभी राजनीतिक पंडितों को चौंका दिया था. वहीं झाविमो के शबा अहमद ने भी 57,380 वोट लाकर संतोषजनक प्रदर्शन किया था.
पार्टी के अंदर सांसद के खिलाफ बढ़ा है असंतोष
सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय के लिए इस बार विपक्षी गठबंधन की रणनीति के साथ-साथ पार्टी के अंदर खुद के खिलाफ असंतोष और भीतरघात से निपटना भी काफी कड़ी चुनौती होगी. पार्टी के कई बड़े नेता उनसे असंतुष्ट चल रहे हैं. इसमें कई सांसद, विधायक और पदाधिकारी शामिल हैं. बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो तो पहले ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं. सूत्रों से यह बात सामने आ रही है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के झारखंड दौरे के वक्त पार्टी के एक धड़े ने सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय की कार्यशैली और अन्य विवादों की शिकायत भी की थी.
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इसमें इस बार गिरिडीह लोकसभा सीट से किसी अन्य उम्मीदवार को टिकट देने की बात की चर्चा की सुगबुगाहट भी सामने आयी थी. अब ऐसे में रविन्द्र पाण्डेय पार्टी में अपनी स्थिति और हैसियत बचाने में लग गए हैं. लेकिन गिरिडीह सीट बचा पाना उनके लिए मुश्किल ही लग रहा है.
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विपक्षी दलों ने बनाई रणनीति
इस बार प्रमुख विपक्षी दल झामुमो, कांग्रेस और झाविमो ने गिरिडीह लोकसभा सीट को झटकने का पूरा खाका तैयार कर लिया है. इस संबंध में तीनों दलों के शीर्ष नेताओं की कई बार बातचीत हो चुकी है. झारखंड की 14 लोस सीटों में से 5 पर एकजुट होकर जीतने वाले साझा उम्मीदवार के पक्ष में लड़ने की सहमति बन गई है. इनमें गिरिडीह, गोड्डा, खूंटी, लोहरदगा और जमशेदपुर की सीटें शामिल हैं. ऐसे में गिरिडीह सीट पर पहले से मजबूत झामुमो को झाविमो और कांग्रेस का साथ मिलने से भाजपा उम्मीदवार के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी.
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