
Giridih: गांवा प्रखंड के बगदेयडीह गांव में प्रवासी मजदूर की रिपोर्ट कोलकाता से पॉजिटिव आने के बाद भी गिरिडीह प्रशासन गांव को सैनिटाइज करना भूल गया. गावां प्रखंड प्रशासन ने सिर्फ गांव के इंट्री प्वाइंट पर बैरियर लगाकर खानापूर्ति कर दी.
प्रवासी मजदूर के साथ आयी उसकी पत्नी को बच्चे के साथ होम क्वारेंटीन किया गया है लेकिन पत्नी लगातार घर से बाहर निकल रही है. उसका सैंपल भी नहीं लिया गया है. इधर ग्रामीणों का भी कहना है कि कोरोना संक्रमित प्रवासी मजदूर को आइलोशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. लेकिन संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए जो एहतियातन कार्रवाई होनी चाहिए वह गांवा के पदाधिकारी भूल गये हैं. सैनिटाइज नहीं होने से ग्रामीणों को चिंता इस बात की है कि कहीं पूरा गांव संक्रमण की चपेट में नहीं आ जाये.
क्या है मामला
गौरतलब है कि बगदेयडीह गांव का प्रवासी मजदूर शनिवार को कोलकाता से अपने घर लौटा था. वहीं दूसरे दिन रविवार को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आयी. जिसके बाद उसके परिवार को होम क्वारेंटीन कर दिया गया, लेकिन पत्नी का सैंपल नहीं लिया गया, ना ही गांव को सैनिटाइज किया गया.
गांव को सैनिटाइज करना है या नहीं. इसे लेकर गांवा की बीडीओ और स्वास्थ विभाग के पदाधिकारियों में भ्रम की स्थिति है. बीडीओ मधु कुमारी का तर्क है कि यह जरूरी नहीं कि जिस गांव से कोरोना संक्रमित मिला है. उस गांव को अब सैनिटाइज किया जाये. जबकि सिविल सर्जन डा. अवद्येश सिन्हा का दावा है कि सोमवार को गांव के सार्वजनिक स्थल को सैनिटाइज कर दिया गया है.
तीन कोरोना संक्रमित ठीक हुए
इधर सोमवार को जिले के लिए दो राहत भरी खबरें भी आयीं. स्वास्थ्य विभाग ने जिले के तीन कोरोना संक्रमितों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी. कोविड-19 हॉस्पिटल में बेंगाबाद, धनवार और पीरटांड के तीन मरीज स्वस्थ हुए हैं. दूसरी रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद तीनों मरीजों को डॉ आशीष सिन्हा की मौजदूगी में स्वास्थ्य कर्मियों ने उपहार देकर उनका उत्साह बढ़ाया. इस बीच सोमवार को जिले के 180 प्रवासी मजदूरों की सैंपल रिपोर्ट निगेटिव आने से स्वास्थ्य विभाग ने राहत की सांस ली है.




