
Giridih/Dhanbad: कोल श्रमिक संगठनों की तीन दिवसीय हड़ताल गुरुवार से गिरिडीह में भी शुरू हो गयी है. हड़ताल के पहले दिन करीब छह श्रमिक संगठन के पदाधिकारी और समर्थकों ने झंडा-बैनर लेकर प्रदर्शन किया. गिरिडीह सीसीएल के ओपेनकास्ट खदान, कबरीबाद खदान, जीएम कार्यालय, वर्कशॉप एरिया, अकांउटेंट कार्यालय पहुंचे, और सारे कार्य को ठप कराया. हड़ताल के पहले दिन ही गिरिडीह सीसीएल को करोड़ो का नुकसान हुआ है.
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हड़ताल में भाजपा के कोल श्रमिक संगठन भारतीय मजदूर संघ के साथ राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकेश मिश्रा, अजीत कुमार, मो. सरफराज के अलावे राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर के एनके सिंह बुल्लू, नरेन्द्र सिन्हा छोटन, यूनाईटेड कोलियरी के देवशंकर मिश्रा, भाकपा माले के राजेश यादव, राजेश सिन्हा, भारतीय मजदूर संघ के प्रमोद सिंह समेत श्रमिक संगठन के सैकड़ो समर्थकों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. हड़ताल समर्थक सबसे पहले ओपेनकास्ट खदान पहुंचे, और कोयला उत्पादन में लगे कर्मियों को वहां से हटाने के बाद सारे काम को ठप कराया.
बिजली-पानी भी बंद
इस दौरान सीसीएल के चानक और लाइन नियंत्रण कक्ष पहुंच कर हड़ताल समर्थकों ने पूरे सीसीएल क्षेत्र के पानी और बिजली आपूर्ति को ठप कराया. इसे सीसीएल क्षेत्र में रहने वाले एक लाख की आबादी बिजली और पानी के ठप किए जाने से प्रभावित हुई है. इस इलाके में रहने वाले लोगों को जहां पानी नहीं मिला. वहीं बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.
इसके बाद कबरीबाद खदान में भी कोयला उत्पादन को हड़ताल समर्थकों ने ठप कराया. साथ ही वर्कशॉप में मशीनों की मरम्मती के काम को भी बंद करा दिया गया. अंत में जीएम और अकांउट कार्यालय पहुंच कर हड़ताल समर्थकों ने केन्द्र सरकार की नीतियों को कोल श्रमिक विरोधी नीति बताते हुए जमकर नारेबाजी की.
इधर धनबाद में हड़ताल का असर दिखा. बंद समर्थकों ने कोयला उत्पादन ठप कराया. साथ ही केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. मजदूरों ने 5 सूत्री मांगों को लेकर हड़ताल की है. जिसमें कॉमर्शियल माइनिंग का निर्णय तत्काल वापस हो, ऑल इंडिया के निजीकरण के प्रयास बंद हो, सीएमपीडीआइएल को कोल इंडिया से अलग ना किया जाए, मेडिकल अनफिट के तहत आश्रितों का नियोजन चालू हो, ठेका मजदूरों को अनुशंसित वेतन का भुगतान हो जैसी मांगें शामिल है.
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