
NewDelhi: मॉब लिंचिंग के दोषियों का स्वागत कर केंद्रीय मंत्री और बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा के खिलाफ विरोध तेज हो गया है. रामगढ़ में 27 जून 2017 को अलीमुद्दीन अंसारी की हुई हत्या के आठ दोषियों को उनकी रिहाई के बाद माला पहनाकर अभिनंदन करना और मिठाई खिलाने को लेकर पहले ही जयंत सिन्हा की काफी किरकिरी हो चुकी है. वही अब पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग की है. साथ ही पूरे मामले में जयंत सिन्हा से सार्वजानिक तौर पर माफी मांगने को भी कहा गया है.
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50 पूर्व आईएएस अधिकारियों के इस समूह ने अपने हस्ताक्षर के साथ जारी पत्र में कहा है कि उनका समूह पिछले एक साल से उन घटनाओं को चिन्हित कर रहा है जहां सरकार नागरिकों को सुरक्षा मुहैया कराने की अपनी ड्यूटी में नाकाम हो रही थी. लेकिन उन्होंने कहा है कि केंद्र सरकार के वरिष्ठ सदस्यों द्वारा घृणित अपराधों में सजायाफ्ता लोगों का खुलेआम समर्थन करना उन नौकरशाहों को गलत संदेश देता है जो नागरिकों के जीवन और उनकी स्वतंत्रता की रक्षा में विश्वास करते हैं.
हस्ताक्षरकर्ताओं ने कहा है कि समूह के लिए मौजूदा घटना इसलिए भी बेहद परेशान करने वाली है क्योंकि इसको एक केंद्रीय मंत्री ने अंजाम दिया है. हालांकि जयंत सिन्हा ने अपने बयान में कानूनी प्रक्रिया के सम्मान का हवाला दिया गया है. और कहा है कि लिंचिंग के सजायाफ्ता दोषियों को उसको हासिल करने का पूरा अधिकार है. लेकिन एक केंद्रीय मंत्री द्वारा मॉब लिंचिंग के दोषियों का इस तरह से स्वागत किया जाना जैसे वो स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारी हों, कतई स्वीकार्य नहीं है. इसमें ये भी कहा गया है कि चौतरफा आलोचना होने के बाद सोशल मीडिया पर आयी उनकी सफाई कोई मायने नहीं रखती है.
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पूर्व नौकरशाहों ने अपने बयान में कहा गया है कि मंत्री को हत्या के दोषियों के साथ सहानुभूति रखने वाले अपने इस घृणित्य कृत्य के लिए तत्काल माफी मांगनी चाहिए. पूर्व नौकरशाहों ने कहा है कि “हम पूरी मजबूती के साथ उनकी उस हरकत की निंदा करते हैं जो भारत के संविधान और कानून के शासन की अवमानना के बराबर है और जिसका पालन करना उनकी जिम्मेदारी बनती है.”
पूर्व आईएएस के समूह का कहना है कि जयंत सिन्हा की इस हरकत का दूरगामी संदेश यह है कि किसी के भी पास अल्पसंख्यकों की हत्या का लाइसेंस है और जो इस तरह के किसी अपराध का आरोपी है उसका वित्तीय, कानूनी और राजनीतिक हर लिहाज से उत्साहपूर्वक सहयोग और समर्थन किया जाएगा.
नौकरशाहों ने इस सिलसिले में दादरी में आरोपी के शव को तिरंगे में लिपटाने, कठुआ में गैंगरेप के आरोपियों के पक्ष में मंत्रियों द्वारा तिरंगा लेकर जुलूस निकालना और राजसमुंद के बर्बर हत्या के मामले का हवाला भी दिया. उन्होंने कहा कि कानून के शासन की अवमानना का खेल सत्तारूढ़ दल और उसके सदस्यों द्वारा बदस्तूर जारी है.
अपने पत्र में पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि पहले जब इस तरह के पक्षपातपूर्ण रवैये के खिलाफ आवाज उठायी जाती थी तो केंद्र सरकार, कानून और व्यवस्था को राज्य का मामला बता कर अपना पल्ला झाड़ लेती थी. लेकिन आज इनमें से ज्यादातर राज्य उसी पार्टी द्वारा शासित हैं जिसकी केंद्र में सरकार है. लेकिन अब इस मामले में सीधे एक केंद्रीय मंत्री शामिल है. जिसमें अभियुक्तों को उसकी अपनी ही पार्टी की सरकार ने सजा दिलाकर आरोपियों को न्याय के कठघरे में खड़ा किया है. ऐसे में नौकरशाह इस बात को जानना चाहते हैं कि इस मसले पर भारत सरकार का क्या रुख होगा?
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पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि “हम तत्काल श्री जयंत सिन्हा के केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफे/बर्खास्तगी और उस पार्टी से जिसका वो प्रतिनिधित्व करते हैं हत्या के सजायाफ्ता दोषियों के प्रति सहानुभूति रखने के लिए भारत की जनता से माफी की मांग करते हैं.”
इसके साथ ही उन्होंने सिविल सेवा में मौजूद अपने सहयोगियों से कानून के शासन का पूरी दृढ़ता के साथ पालन करने की अपील की है. समूह ने कहा है कि ऐसे शक्तिशाली और प्रभावशाली समूहों की कार्रवाइयों से प्रभावित होने की जरूरत नहीं है जो बहुल संस्कृति वाले हमारे समाज में नफरत और घृणा का विष फैलाने की कोशिश कर रहे हैं.
पिता यशवंत सिन्हा ने भी की थी आलोचना
बीजेपी सांसद जयंत सिन्हा के इस कदम की उनके पिता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने भी आलोचना की थी. उन्होंने पूरे मामले को लेकर ट्वीट करते हुए कहा था कि, ‘पहले में लायक बेटे का नालायक पिता था, लेकिन अब रोल बदल गया है.’

गौरतलब है कि 27 जून 2017 को कथित रुप से बीफ की तस्करी का आरोप लगाते हुए मीट व्यापारी अलीमुद्दीन अंसारी की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में लोअल कोर्ट ने 11 लोगों को दोषी ठहराया है. वही इनमें से आठ दोषियों को हाईकोर्ट से 30 जून को बेल मिल गयी. जिनकी रिहाई 4 जुलाई को हुई. वही हत्या के दोषियों का स्वागत करने पर कांग्रेस ने भी केंद्रीय मंत्री का इस्तीफा मांगा है.
निम्नलिखित पूर्व नौकरशाहों ने जताया विरोध
1. Salahuddin Ahmad IAS (Retd.) Former Chief Secretary,
Govt. of Rajasthan
2. G. Balachandhran IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of West Bengal
3. Vappala Balachandran IPS (Retd.) Former Special Secretary,
Cabinet Secretariat, GoI
4. Gopalan Balagopal IAS (Retd.) Former Special Secretary,
Govt. of West Bengal
5. Chandrashekhar Balakrishnan IAS (Retd.) Former Secretary, Coal, GoI
6. Dr. Pradip Bhattacharya IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of West Bengal
7. Meeran C Borwankar IPS (Retd.) Former DGP, Bureau of
Police Research and Development, GoI
8. Sundar Burra IAS (Retd.) Former Secretary, Govt. of
Maharashtra
9. Kalyani Chaudhuri IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of West Bengal
10. Anna Dani IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of Maharashtra
11. Vibha Puri Das IAS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
Tribal Affairs, GoI
12. Nareshwar Dayal IFS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
External Affairs and High Commissioner to the United Kingdom
13. Keshav Desiraju IAS (Retd.) Former Health Secretary, GoI
14. M.G. Devasahayam IAS (Retd.) Former Secretary, Govt. of Haryana
15. Sushil Dubey IFS (Retd.) Former Ambassador to Sweden
16. Tuktuk Ghosh IAS (Retd.) Former Special Secretary
and Financial Adviser, Ministry of Road Transport & Highways, Shipping & Tourism, GoI
17. Meena Gupta IAS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
Environment & Forests, GoI
18. Ravi Vira Gupta IAS (Retd.) Former Deputy Governor,
Reserve Bank of India
19. Wajahat Habibullah IAS (Retd.) Former Secretary, GoI and
Chief Information Commissioner
20. Sajjad Hassan IAS (Retd.) Former Commissioner
(Planning), Govt. of Manipur
21. Dr. M.A. Ibrahimi IAS (Retd.) Former Chief Secretary
(rank), Govt. of Bihar
22. Kamal Jaswal IAS (Retd.) Former Secretary,
Department of Information Technology, GoI
23. Ajai Kumar Indian Forest
Service (Retd.)
Former Director, Ministry of Agriculture, GoI
24. Arun Kumar IAS (Retd.) Former Chairman, National
Pharmaceutical Pricing Authority, GoI
25. Brijesh Kumar IAS (Retd.) Former Secretary,
Department of Information Technology, GoI
26. Harsh Mander IAS (Retd.) Govt. of Madhya Pradesh
27. Lalit Mathur IAS (Retd.) Former Director General, National Institute of Rural Development, GoI
28. Aditi Mehta IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of Rajasthan
29. Sonalini Mirchandani IFS (Resigned) GoI
30. Deb Mukharji IFS (Retd.) Former High Commissioner
to Bangladesh and Ambassador to Nepal
31. Nagalswamy IA&AS (Retd.) Former Principal Accountant
General, Tamil Nadu & Kerala
32. Sobha Nambisan IAS (Retd.) Former Principal Secretary
(Planning), Govt. of Karnataka
33. Amitabha Pande IAS (Retd.) Former Secretary, Inter-State
Council, GoI
34. Niranjan Pant IA&AS (Retd.) Former Deputy Comptroller &
Auditor General of India
35. Alok Perti IAS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
Coal, GoI
36. T.R. Raghunandan IAS (Retd.) Former Joint Secretary,
Ministry of Panchayati Raj, GoI
37. N.K. Raghupathy IAS (Retd.) Former Chairman, Staff
Selection Commission, GoI
38. M.Y. Rao IAS (Retd.)
39. Julio Ribeiro IPS (Retd.) Former Adviser to Governor
of Punjab & Ambassador to Romania
40. Aruna Roy IAS (Resigned)
41. Manabendra N. Roy IAS (Retd.) Former Additional Chief
Secretary, Govt. of West Bengal
42. Deepak Sanan IAS (Retd.) Former Principal Adviser
(AR) to Chief Minister, Govt. of Himachal Pradesh
43. Umrao Salodia IAS (Retd.) Former Chairman, Rajasthan Road Transport Corporation, Govt. of Rajasthan
44. N.C. Saxena IAS (Retd.) Former Secretary, Planning
Commission, GoI
45. Ardhendu Sen IAS (Retd.) Former Chief Secretary,
Govt. of West Bengal
46. Abhijit Sengupta IAS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
Culture, GoI
47. Aftab Seth IFS (Retd.) Former Ambassador to
Japan
48. Raju Sharma IAS (Retd.) Former Member, Board of
Revenue, Govt. of Uttar Pradesh
49. Jawhar Sircar IAS (Retd.) Former Secretary, Ministry of
Culture, GoI, & CEO, Prasar Bharati
50. Ramani Venkatesan IAS (Retd.) Former Director General,
YASHADA, Govt. of Maharashtra




