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20 वर्षों में पहली बार चला अफीम के खिलाफ सबसे बड़ा अभियान

Khunti: खूंटी जिले में वर्ष 2005 से अफीम की खेती शुरू हुई हुई थी. तब इक्के-दुक्के लोगों ने अफीम की खेती की थी. वर्ष 2007 में लोगों ने कुन्दी बरटोली में खूंटी-मुरहू सड़क के किनारे, पोकला जंगल, बगमा, डेहकेला आदि गांवों में खुलेआम अफीम लगाना शुरू कर दिया था. धीरे-धीरे अफीम के बड़े कारोबारी खूंटी के सेफ जोन मानकर अपने लोगों को गांवों में भेजना शुरू किया. 2024-25 तक अफीम की खेती धान की खेती की तरह होने लगी. यह सरकार के लिए बड़ी मुसीबत बन गई.

ट्रैक्टर, ड्रोन, सेटेलाईट से लैस एक हजार जवान हैं अभियान में शामिल

20 वर्षों बाद राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने अफीम के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया. खूंटी में ग्यारह दिसंबर 2024 से अफीम के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू हुआ. 20 वर्षों में पहली बार अफीम नष्ट करने के लिए ट्रैक्टर, ड्रोन, सेटेलाईट का इस्तेमाल शुरू हुआ पुलिस मुख्यालय द्वारा उपलब्ध कराए गए एक हजार जवानों के साथ अफीम के खिलाफ अभियान चला.

उपायुक्त लोकेश मिश्रा और एसपी अमन कुमार के कुशल निर्देशन में जमकर अफीम के खिलाफ अभियान चलाया गया. ड्रोन के माध्यम से खेतों की पहचान कर अफीम की फसलों को ट्रैक्टर से रौंदा गया.

अब भी बचे हैं अफीम

अफीम के खिलाफ चल रहे इतने बड़े अभियान के बावजूद खूंटी जिले में समुल रूप से अफीम की फसलों को खत्म नहीं किया जा सका, हालांकि पुलिस ने अब तक तेरह हजार एकड़ में लगे अफीम की फसलों को विनष्ट कर दिया है.अफीम की खेती करने वाले 86 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया.

अफीम के खिलाफ ताबड़तोड़ अभियान के बाद बाजार में सन्नाटा

अफीम के खिलाफ चलाए गए ताबड़तोड़ अभियान के बाद अब बाजार में सन्नाटा पसर गया है. जिले के पेट्रोल पंपों की बिक्री आधी हो गई है. पंपसेट, बाईक, खाद की दुकानों, शराब की दुकानों में बिक्री घटी है. सड़क पर बाइकों की संख्या भी अब पहले की तुलना में कम है. दुकानदारों में निराशा है. इस वर्ष कई पंपसेट और खाद दुकानदारों ने अफीम का सीजन आते ही अपनी तैयारियां तेज कर दी थी. पंपसेट बनाकर हर दिन हजारों कमाने वाले मैकेनिक भी अब हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं. बताया जा रहा है कि अब रोजगार के लिए पलायन करने वाले युवकों की संख्या भी बढ़ गई है. अफीम के भरोसे प्राईवेट स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने वाले भी परेशान हैं। अब वे अपने बच्चों का नाम प्राईवेट स्कूलों से कटवाकर सरकारी स्कूलों में कराने की तैयारी कर रहे हैं.

विकल्प के लिए सरकार को युद्ध स्तर पर चलाना होगा अभियान : अलेस्टेयर

झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने कहा है कि सरकार और प्रशासन ने जिस तरिके से अफीम के खिलाफ अभियान चलाया है अब उसी तरिके से विकल्प के लिए भी अभियान चलाना चाहिए. अलेस्टेयर बोदरा ने कहा कि किसानों को सरकार की तमाम कृषि सुविधाओं का लाभ देना चाहिए, जिससे उनकी उन्नति हो सके. सरकार को लाह के साथ दलहन और तेलहन और यहां के वातावरण के अनुसार कृषि को बढ़ावा देना चाहिए.

हंड़िया-दारू का नशा छूट जाता है, अफीम का नशा मरने के बाद छूटता है: एसपी

एसपी अमन कुमार ने कहा कि अफीम की खेती अर्थात जहर की खेती. खूंटी में अफीम की खेती होती है और दूसरे जिलों और राज्यों में इसका सेवन कर बच्चे मर रहे हैं. जिस दिन खूंटी में लोग अफीम का सेवन करने लगेगें, उस दिन यहां की स्थिति भयावह हो जाएगी. हंड़िया-दारू, सिगरेट का नशा तो लोग छोड़ सकते हैं, लेकिन अफीम का नशा मरने के बाद ही छूटता है. एसपी ने कहा कि आज एक सर्वे में यह बातें सामने आई है कि वैसे गांव जहां अफीम की खेती होती है, उन गांवों में अन्य गांवों की तुलना में लोगों की मौत ज्यादा हो रही है. किसानों को वैकल्पिक खेती करने में जिला प्रशासन मदद कर रही है.

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