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धनबाद में NH-2 जीटी रोड से कोयले और पशु की बेखौफ तस्करी धड़ल्ले से जारी, रमेश गोप ‘किंगपिन’

Manoj Mishra

Dhanbad : आठ महीने से लगातार कोयला तस्करी की डंका बजते रहने के बाद एक जून से धनबाद में कोयला तस्करी पर धनबाद SSP के कड़े आदेश पर रोक लगा दी गई थी. धनबाद के SSP संजीव कुमार ने पुलिस के तेज-तर्रार अफसरों की विशेष टीम गठित कर विशेष अभियान चलाने की बात कही थी. अभियान भी चला और कोयला तस्कर पर कार्रवाई भी की गई. जिला प्रशासन ने ‘किंगपिन’ कहे जाने वाले ओझा सिंडिकेट की कमर तोड़ दी.

ओझा के शिवम हार्डकोक का लाइसेंस रद्द किया गया. बाघमारा इलाके के माधो सिंह पर मामला दर्ज हुआ. धनबाद SSP के कड़े रूख के बाद जिले के बड़े और छोटे तस्कर अंडरग्राउंड हो गए. मोबाइल फोन तक बंद कर लिया गया. लेकिन, इस बीच जून महीने के मध्य से अबतक धनबाद में NH-2 जीटी रोड से कोयले और पशु की बेखौफ तस्करी धड़ल्ले से जारी है. गोबिंदपुर, निरसा, मैथन के अवैध कोयला कारोबारी चांदी काट रहे हैं.

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जिले में कोयले के काले कारोबार के खिलाफ आवाज उठने के बावजूद यह बिना किसी बाधा के जारी है. पूरे धंधे में मैनेज का खेल चल रहा है. पुलिस, सीआईएसएफ से लेकर प्रशासन के कुछ बड़े लोग, बीसीसीएल अधिकारी, यूनियन नेता, जनप्रतिनिधि तक मैनेज होकर अपने हाथ काले कर रहे हैं. गोबिंदपुर, मैथन और निरसा क्षेत्र में कुछ खास लोग ही किंगपिन बने हुए हैं. जानकारी के मुताबिक गोबिंदपुर, निरसा कोयलांचल में संचालित हो रहे कोयले के इस अवैध धंधे पर रमेश गोप और एम खान के सिंडिकेट का पूरी तरह से कब्जा है. इनकी छत्रछाया में ही छोटे-बड़े तस्कर कोयले का अवैध कारोबार कर रहे हैं,

कोयला के अवैध कारोबार करनेवाले धनबाद जिला के कई नामचीन किंगपिन ने नाम नहीं छापने के शर्त पर जानकारी देते हुए बताया कि निरसा में महामाया फ्यूल के संचालक रमेश गोप पर पुलिस-प्रशासन की मेहरबानी कायम है.

फलस्वरूप, महामाया फ्यूल से रमेश गोप, कालमाटी मैथन से चंदन अग्रवाल, निरसा बेलचड़ी से टून्ना सिंह, तथा एम खान समेत अन्य छोटे-बड़े अवैध कारोबारी डंके की चोट पर कोयला तस्करी को अंजाम दे रहे हैं. वहीं गोबिंदपुर से रमेश गोप, संजय यादव, संजय सिंह, गफ्फार अंसारी, विजय यादव आदि कोयला तस्करी में सक्रिय है. इनके डिपो से रोजाना 20-25 ट्रक अवैध कोयला बंगाल और यूपी भेजा जा रहा है.

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बताया जा रहा है कि एस मंडल व रमेश गोप के पेपर पर पश्चिम बंगाल में कोयला खपाया जा रहा है. वहीं गणेश पांडेय के पेपर पर बिहार-यूपी से पुरुलिया तक कोयला भेजा जा रहा है.

जबकि, जिले के बाघमारा, झरिया समेत अन्य स्थानों पर अवैध कारोबारी प्रतिक्षारत हैं. यहां के तस्करों को लाखों टोकन मनी जमा करने के बाबजूद तस्करी करने का सर्टिफिकेट नहीं मिला है. जिसके कारण, झरिया में एम सिंह, जी यादव, एम यादव, एस-एस व के कुमार तथा बाघमारा में माधो, टूडू, यादव, महतो, सिंह, शेख, चौहान कोयला तस्करी करने का सर्टिफिकेट लेने की जद्दोजहद कर रहे हैं.

यहां बता दें कि बाघमारा कोयलांचल में आर टुडू का एकछत्र राज है. उसकी छत्रछाया में ही कई छोटे-बड़े सिंडिकेट व धंधेबाज कोयले का अवैध कारोबार संचालित करते हैं. यहां टुडू के इशारे पर ही अवैध धंधेबाजों का पूरा सिंडिकेट संचालित होता है. बिना टुडू की अनुमति के काम करनेवाले लोगों की गाड़ियां पकड़ ली जाती है.

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कोयला तस्करों की दलील सब सेट है

धनबाद के कोयला और पशु तस्करों की दलील चौंकाने वाली है. कोयला तस्करों एवं जानकारों का दावा है कि निरसा, गोबिंदपुर, मैथन क्षेत्र में कोयला तस्करी के लिए पुलिस-प्रशासन से सर्टिफिकेट लेना पड़ता है. छोटे डिपो के लिए 25 लाख तथा बड़े डिपो के लिए 5 करोड़ मासिक रेट तय है. वहीं डिस्को पेपर बनाने वाले गैंग को भी मासिक दर तय किया गया है. एक कोयला तस्कर का दावा है कि गणेश पांडेय को पेपर बनाने के एवज में प्रतिमाह 2 करोड़ की राशि तय किया गया है. बता दें कि गणेश पांडेय के पेपर पर बिहार-यूपी से पुरुलिया तक कोयला भेजा जा रहा है. इधर, जी पांडेय, वी चौधरी, वी महतो व आर शर्मा के पेपर पर बिहार व यूपी की मंडियों में अवैध कोयला पहुंच रहा है, इनसे भी करोड़ की डील तय है. उल्लेखनीय है कि तय राशि मिलने के बाद ही कोयला तस्करी का सर्टिफिकेट दिया जाता है.

मालूम हो कि फिलवक्त एक दर्जन से अधिक कोयला तस्कर तय रेट भुगतान कर सर्टिफिकेट नहीं मिलने का रोना रोते हैं और किंगपिन रमेश गोप को कोसते हैं. हलांकि, रमेश गोप अपने उपर लगे आरोपों को खंडन करते हुए बदनाम करने की साजिश करार दे रहे हैं.

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जीटी रोड पर सरपट दौड़ रही पशु तस्करों का वाहन

धनबाद के एनएच 2 जीटी रोड से इनदिनों पशु तस्करों का वाहन सरपट दौड़ रहा है. तोपचांची से लेकर मैथन- चिरकुंडा तक सरपट दौड़ती तस्करों के वाहनों को रोकना किसी थाना प्रभारी के बस में नहीं है और न ही गश्ती दल को इन वाहनों को रोकने की इजाजत है. बताया जाता है कि जिले के तोपचांची, राजगंज, बरवाअड्डा, गोबिंदपुर, निरसा, मैथन, चिरकुंडा थाना तक मामला सेट है. एक तस्कर का दावा है कि पांच करोड़ मासिक नजराना पर इन थानों की बोली लगी है. फलस्वरूप, कोई भी थानेदार पशु लदे वाहनों पर कार्रवाई नहीं करता.

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