
Ranchi : कार्य में शिथिलता बरतने के मामले में दंड स्वरूप निंदन की सजा झेल रहे पेयजल स्वच्छता विभाग के मुख्य अभियंता संजय कुमार झा के मामले में झारखंड हाइकोर्ट में दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी हो गयी. हाइकोर्ट के जस्टिस डॉ एसएन पाठक की कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित रख लिया. प्रार्थी ने रिट याचिका दायर कर निंदन की सजा को हटाने की गुहार कोर्ट से लगायी थी. उनकी ओर से कोर्ट में कहा कि निंदन की सजा झारखंड सरकारी सेवक नियमावली 2016 के रूल 19 के प्रावधान के अनुसार नहीं है. उनको दिये गये शो कॉउज नोटिस में सजा पहले ही निर्धारित कर दिया गया था, तो फिर उनसे जवाब मांगने का क्या औचित्य था. विभाग की ओर से पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर उन्हें निंदन की सजा दी गयी.
विभाग में इंजीनियर इन चीफ पद के लिए वे सीनियरिटी लिस्ट में टॉप पर हैं, इसलिए उनकी प्रोन्न्ति को बाधित करने के लिए उन्हें यह सजा दी गयी है.
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बता दें कि प्रार्थी का कहना है कि भारत सरकार के जल जीवन मिशन के तहत कुछ कार्य सौंपा गया था. इन्हें अक्टूबर 2021 में कार्य में शिथिलता बरतने को लेकर उन्हें शो कॉउज जारी कर कहा गया कि क्यों नहीं आपको दंडित किया जाये. इसमें उन्हें मिलनेवाले दंड को भी दर्शाया गया था.
साथ ही दो दिनों में उनसे जवाब भी मांगा गया था. बाद में विभाग की अनुशंसा पर उन्हें दिसंबर 2021 में निंदन की सजा दी गयी. प्रार्थी की ओर से दिवाकर उपाध्याय ने पैरवी की.
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