Main SliderRanchi

पंजाब-हरियाणा के जैसे यहां के किसानों को नहीं मिलती सरकारी सुविधाएं, तो कृषि बिल का असर भी नहीं पड़ने वाला

कृषि बिल पर क्या कहते हैं किसान-2

Ranchi:  राज्य के किसानों को कृषि बिल से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला. यहां के किसान तो ऐसे ही किसी सरकारी योजना का लाभ नहीं उठा पाते. पंजाब-हरियाणा आदि राज्यों के जैसे किसी केंद्र सरकार ने यहां के किसानों पर ध्यान भी नहीं दिया. ऐसी बातें होसिर पंचायत के सरपंच लक्ष्मण साहू ने की.

लक्ष्मण 24 साल की उम्र में सरपंच बने. क्षेत्र के किसानों और उनकी समस्या से वाकिफ रखते हैं. लक्ष्मण कहते हैं उन्हें कृषि बिल के बारे में जानकारी है. उनके अनुसार, ये बिल किसानों के हित में है. लेकिन राज्य के किसानों को इससे लाभ नहीं मिलने वाला. क्योंकि कृषि संबधी कोई भी योजना हो, चाहे वो केंद्र सरकार की हो या राज्य सरकार की हो, योजनाएं धरातल पर नहीं दिखती. यहां तो एमएसपी में देरी के कारण, किसान धान क्रय केंद्रों में धान तक नहीं बेचते. तो सरकारी योजनाएं सफल कैसे होगी.

इसे भी पढ़ेंः राज्य में रजिस्टर्ड मजदूरों की संख्या दस लाख 50 हजार, उपलब्ध रोजगार मात्र 3000

क्रेडिट कार्ड मात्र लोन, सुविधा नहीं

कृषि बिल और सरकारी योजनाओं का जिक्र करते हुए लक्ष्मण ने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड राज्य के किसानों के लिये मात्र लोन है. जबकि पंजाब-हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों को इससे बीज, ट्रैक्टर, यूरिया जैसी चीजें मिलती है. यहां किसानों को लोन मिलता भी है तो मात्र बीस से पचास हजार तक.

जबकि क्षेत्र के 98 फीसदी लोग कृषक है. हर साल किसान चार-पांच सौ देकर फसल बीमा कराते हैं, लेकिन कभी नहीं सुना कि किसी किसान को फसल बीमा का लाभ मिला हो. ऐसे में कृषि बिल से लाभ हो या हानि किसानों को कोई फर्क नहीं पड़ता. लक्ष्मण ने बताया कि उनका पारिवारिक पेशा कृषि है. ये चार एकड़ में धान और 50 डिसमिल में सब्जियां उगाते है. इसके बाद भी इन्होंने कभी धान क्रय केंद्र में धान नहीं बेचा.

क्रय केंद्र नहीं होने के कारण किसान लाभान्वित नहीं

लक्ष्मण ने बताया कि क्षेत्र के लोग पिछले पांच साल से कोल्ड स्टोरेज की मांग कर रहे हैं. आलू, गोभी जैसी फसलें अधिक होने के कारण लोगों को स्टोरेज की जरूरत है. प्रखंड स्तर पर कई बार मांग की गयी, लेकिन कुछ नहीं किया गया. लक्ष्मण के गांव से निकट मात्र तीन धान क्रय केंद्र है. जो कि सुकूरहुटू, पिठोरिया और प्रखंड परिसर में है. जबकि हर पंचायत स्तर पर एक धान क्रय केंद्र की जरूरत है.

इसे भी पढ़ेंः  रिम्स के इतिहास में सबसे लंबे दिनों तक इलाज कराने वाले मरीज हैं राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button