JharkhandMain SliderRanchi

किसानों ने माना कृषि विधेयक से बर्बाद हो जायेंगे छोटे किसान, विरोध को तैयार पर मजबूत संगठन नहीं

Rahul/Chhaya

Jharkhand Rai

Ranchi : किसानों के लिए मोदी सरकार कानून लेकर आयी है. लेकिन खेती बड़ी-बड़ी कंपनियां करने लगेंगी, तो किसानों को नुकसान है. मंत्री हरसिमरत कौर ने इन विधेयकों के विरोध में इस्तीफा दे दिया. ये कहना है सोमा उरांव का. जो ईटकी प्रखंड के मोरो गांव के निवासी हैं. सोमा के परिवार का मुख्य पेशा कृषि ही है. जो धान समेते आलू, मटर, गोभी की फसल लगाते हैं. सोमा को केंद्र सरकार की ओर से पारित तीन कृषि विधेयक की जानकारी है. उनका कहना है कि उनके गांव में लगभग 80 प्रतिशत लोग खेती बाड़ी करते हैं. जो इनका मूल पेशा है.

लेकिन कृषि विधेयक के नुकसान और फायदे के बारे में बहुत कम किसानों को ही पता है. जो इन विधेयकों का विरोध भी कर रहे हैं. गांव के अन्य किसानों से बात करने से जानकारी हुई कि उन्हें इस विधेयक के बारे में मंत्री हरसिमरत कौर के इस्तीफा के बाद पता चला. सुदूर गांव के किसान भी इन विधेयकों के विरोध में हैं.

इन किसानों का कहना है कि अगर उन्हें एक संगठन मिले तो विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार हैं. बता दें कि इन विधेयकों का विरोध कर रहे किसानों पर हरियाणा सरकार ने लाठीचार्ज किया था.

Samford

इसे भी पढ़ें –आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर लगेगी रोक, रोजगार और किसानों के मुद्दे पर सरकार गंभीर: सीएम हेमंत

छोटे और मध्यम किसान हो जायेंगे बर्बाद

इसी गांव के शिवा मिंज ने कहा कि विधेयक की कुछ जानकारी तो है. काफी विरोध किया जा रहा है. इन्होंने बताया कि उनके गांव में छोटे और मध्यम किसानों की संख्या अधिक है. ऐसे विधेयक से किसानों को लाभ नहीं है. एक बाजार हो जाने से मोरो गांव के किसान तो बाजार तक उपज बेच भी नहीं पायेंगे. इन्होंने कहा कि अभी तो ईटकी और नगड़ी बाजार में उपज बेच रहे हैं. धान तो बिचैलिया या धान क्रय केंद्र के भरोसे बिक जाता है.

लेकिन विधेयक के अनुसार बाजार व्यवस्था होने से किसान बर्बाद हो जायेंगे. शिवा ने कहा कि इस साल कोरोना के बाद से लगातार फसल बर्बाद हुई. अब भी बारिश इतनी है कि आलू, फ्रेंच बीन, धनिया पत्ती जैसी फसलें बर्बाद हो गयी हैं. पहले वाहन की सुविधा नहीं थी, तो सब्जियां बाजार में नहीं गयी. अब बारिश से फसल बर्बाद हो रही. ऐसे में सरकार को चाहिए कि किसानों के हित में विधेयक लायें.

एक संगठन की जरूरत है, विरोध के लिए तैयार

पिछले दिनों विधानसभा में भी विधेयक का विरोध प्रदर्शन किया गया. 25 सितंबर को देशभर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जायेगा. हालांकि हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू है. राज्य में विपक्षी दल और वाम दलों की ओर से लगातार इस विधेयक का विरोध किया जा रहा है.

वामदलों के किसान संगठन की ओर से 25 सितंबर के विरोध-प्रदर्शन को समर्थन दिया गया है. लेकिन सुदूर गांव के लोगों को इसकी जानकारी नहीं है. मोरो और मल्टी गांव के लोगों ने बताया कि प्रखंड स्तर पर विरोध किया जाना है, इसकी जानकारी नहीं. स्थानीय किसान नेताओं ने भी अब तक ऐसा कुछ नहीं कहा. लोगों ने कहा कि अगर एक संगठन हो, तो क्षेत्र के किसान विरोध के लिए तैयार हैं.

क्या है अध्यादेश में

पहले विधेयक में एक देश एक बाजार की बात की गयी है. इसके तहत एपीएमसी एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी मार्केट के बाहर कृषि उपज की खरीद होगी. एपीएमसी व्यवस्था को खत्म कर दिया जायेगा.

बता दें कि एपीएमसी मार्केट व्यवस्था खत्म होने से राज्य सरकार किसानों के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगी. किसान का सामान लेने वाली कंपनी और किसान के बीच होने वाले विवाद को एसडीओ के जरिये समाधान किया जायेगा. इसके लिए तीस दिन का समय होगा. किसानों को कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ कोर्ट तक जाने का विकल्प नहीं होगा.

दूसरे विधेयक के अनुसार आवश्यक वस्तु कानून के तहत भंडारण में लगे रोक हटा लिये गये हैं. पहले व्यापारियों को गेंहू, चावल आदि के भंडारण के लिए सीमा तय की गयी थी. इस अध्यादेश के बाद यह सीमा हटा ली गयी है. स्पष्ट है किसानों से उपज लेने वाली कंपनियां लंबे समय तक भंडारण रखेगी और अधिक दामों में बेचेगी.

तीसरे विधेयक के अनुसार, कांट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा दिया गया है. जिससे बड़ी-बड़ी कंपनियां खेती करेंगी. लेकिन खेतों में किसान मजदूर की भूमिका में होंगे. इससे किसानों के शोषण की संभावना अधिक है.

इसे भी पढ़ें –हरिवंश जी का ‘आहत’ होना!

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: