
Lohardaga : गुरुवार को नेत्रदान पखवाड़ा कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य विभाग के तत्वावधान में किया गया. जनमानस में नेत्रदान को अपनाने के साथ-साथ दाता के परिवार की सहमति और इसे पारिवारिक परंपरा के रूप में प्रतिस्थापित कर उत्प्रेरित करने एवं इसके प्रति फैली भ्रांतियों के निवारण के लिए जागरूकता रैली निकाली गयी. यह रैली गिरिवर शिशु सदन विद्यालय के स्कूली बच्चों द्वारा निकाली गयी, जिसे उपायुक्त बिनोद कुमार ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. यह रैली सदर अस्पताल परिसर से निकलकर नगर परिषद क्षेत्र में घूमी, जिसमें शामिल बच्चों ने नारे के साथ लोगों को जागरूक किया.
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प्रकृति ने मानव को दृष्टि के रूप में अमूल्य उपहार दिया है
इस अवसर पर उपायुक्त बिनोद कुमार ने कहा कि प्रकृति ने मानव को दृष्टि के रूप में एक ऐसा अमूल्य उपहार दिया है, जिसकी कोई कीमत नहीं आंकी जा सकती है. जिस अंधकार में हम एक क्षण बिताने की कल्पना नहीं कर सकते, उसी गहन अंधकार में कितने ही लोग जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं. क्या इनके जीवन में प्रकाश की कोई किरण आ सकती है? इस प्रश्न का उत्तर निःसंदेह हां है. कई लोग मरणोपरांत नेत्रदान करते हैं. नेत्रदान वह प्रक्रिया है, जिसमें मानव नेत्र दानदाताओं से उनकी मृत्यु के बाद ग्रहण किये जाते हैं. नेत्रदान से प्राप्त इन आंखों की स्वच्छ कॉर्निया को ऐसे दृष्टिहीन व्यक्ति, जिनका जीवन कॉर्निया में सफेदी आ जाने से अंधकारमय हो गया है, को प्रत्यारोपित कर नेत्र ज्योति लौटायी जा सकती है. आमतौर पर नेत्रदान के संबंध में अधिक जानकारी आम नागरिकों को नहीं है. हर स्वस्थ व्यक्ति, जिसकी आंखें सही-सलामत हैं, नेत्रदान की घोषण कर सकता है. इस हेतु एक शपथ का फॉर्म भरना होता है, जो प्रायः सभी सरकारी चिकित्सालयों, निजी नेत्र के विशेषज्ञों के पास उपलब्ध होता है. नेत्रदान महादान है. लोग आगे आयें और इस पुण्य कार्य को करें, जिसकी बदौलत किसी नेत्रहीन का जीवन प्रकाशमय हो सकता है.
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रैली में डॉ विजय कुमार, डॉ एसपी शर्मा, डॉ बीके पांडेय, अजय कुमार, विनय कुमार रवि, हरियाली खाखा, ऋतु कुमारी, निलेश कुमार, राजेश्वर महतो, लखन लाल मांझी, अलका सिन्हा, ओम प्रकाश गुप्ता, प्रदीप राम और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी और स्कूल की शिक्षिकाएं उपस्थित थे. इस अवसर पर इच्छुक व्यक्तियों द्वारा नेत्रदान बंधक पत्र भरा गया.




