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राशि निर्गत कराने वाली फाइल पर कल्याण मंत्री लुईस मरांडी ने लिखा, क्या योजनाओं के लिए मेरा अनुमोदन जरूरी नहीं (2)

Akshay Kumar Jha

Ranchi : कहने को तो किसी मंत्रालय में मंत्री के पास इतनी शक्ति रहती है कि विभाग में एक पत्ता भी बिना मंत्री के नहीं हिल सकता. लेकिन यह भी तभी संभव है, जब विभाग में काम करने वाले ब्यूरोक्रेट मंत्री को ऐसा करने दें. भले ही अभी कल्याण विभाग की मंत्री लुईस मरांडी और विभाग की सचिव हिमानी पांडे के बीच विवाद की कोई खबर आम ना हुई हो. लेकिन बाहर से ऑल इज वेल का जो तमंगा पब्लिक को दिख रहा है, वो सही नहीं है. मंत्री सचिव से नाराज तो हैं, लेकिन जाहिर नहीं कर रही हैं. बार-बार मंत्री लुईस मरांडी को साइड करने को लेकर अब फाइलों पर मंत्री ने खुद लिखना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी से जुड़ा मामला हाल के दिनों में सामने आया है.

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राशि निर्गत कराने वाली फाइल पर मंत्री ने लिखा

SCA to TSP यानि Special Component Assistance to Tribal Sub Plan के लिए योजना पिछले वित्त वर्ष की ही तरह इस साल भी बिना मंत्री लुईस मरांडी के अनुमोदन के गया. केंद्र से राशि विभाग के खाते में आने के बाद राशि निकासी के लिए फाइल मंत्री लुईस मरांडी के पास आयी. जिसके बाद सचिव कार्यालय से फाइल के बारे में पूछा जाने लगा. साथ ही फाइल को पूरा करने के लिए मंत्री से बार-बार कहा जाने लगा. पिछले वित्त वर्ष भी ऐसा ही कुछ हुआ था. मंत्री के बिना अनुमोदन के योजनाएं केंद्र को भेज दी गयी थी. इस बार भी ऐसा होने की वजह से फाइल पर मंत्री ने दो टिप्पणी की. जो अपने-आप में एक बड़ा सवाल है.

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1) मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति में चयनित योजना, जो भारत सरकार को भेजी जानी है. उन योजनाओं पर विभागीय मंत्री के रूप में क्या मेरे अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है.

2) शिक्षा विभाग के लिए निर्माण होने वाले स्कूल के लिए कल्याण विभाग से राशि दी जा रही है. उस विद्यालय में क्या अनुसूचित जनजाति समुदाय के बच्चे ही अध्ययन करेंगे. क्योंकि इस राशि से सिर्फ अनुसूचित जनजाति को ही फायदा पहुंचाना है.

राशि कल्याण विभाग की लेकिन पर्यटन व शिक्षा विभाग में होती है खर्च 

यह कानून है कि SCSP (Schedules Caste Sub-Plan) और TSP (Tribal Sub PLan) के तहत खर्च की जाने वाली राशि पर पूरी तरह से राज्य के कल्याण विभाग का अधिकार होता है. बावजूद इसके केंद्र सरकार से इस मद में आने वाली राशि पर्यटन और शिक्षा विभाग पर खर्च हो रही है. केंद्र सरकार को जिन योजनाओं के बारे में राज्य से बिना मंत्री के अनुमोदन के भेजा जा रहा है, वो सारी योजनाएं पर्यटन और शिक्षा विभाग की हैं. उन स्कूलों के भवन निर्माण हो रहे हैं जो शिक्षा विभाग के हैं. पर्यटन विभाग की कुछ योजनाओं के लिए कल्याण विभाग की राशि खर्च की जा रही है, जो केंद्र सरकार ने आदिवासी बहुल इलाकों में खर्च करने के लिए दिए गए हैं. यह सब इसलिए हो रहा है क्योंकि योजनाओं को केंद्र सरकार के पास भेजने से पहले मंत्री से पूछा तक नहीं जाता है.

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