
Ranchi : बिरसा कृषि विवि के विवि अस्पताल में बुधवार को नि:शुल्क नेत्र जांच शिविर का आयोजन किया गया. शिविर का उद्घाटन कुलपति डॉ ओंकार नाथ सिंह ने किया. मौके पर कुलपति ने विवि के वैज्ञानिकों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं को नेत्र की नियमित देखभाल एवं समय-समय पर नेत्र की जांच कराने की सलाह दी. उन्होंने समय पर नेत्र जांच को भविष्य में होने वाली आंखों की बीमारियों से बचाव का बेहतर विकल्प बताया. कहा कि कोई बीमारी हो गई हो, तो ससमय इलाज करा कर संभावित रोगों से बचाव का समुचित लाभ पाया जा सकता है.
शिविर में कुलपति ने अपना नेत्र जांच कराया और उसके बाद विवि के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ उमाशंकर वर्मा ने अपना नेत्र जांच करायी. इस शिविर में विवि के करीब 196 वैज्ञानिकों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों एवं छात्र-छात्राओं तथा परिवार के सदस्यों ने निः शुल्क नेत्र जांच तथा चश्मे एवं फ्रेम इत्यादि की जांच करायी.
शिविर में बीएयू के मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ यूएस वर्मा, कंपाउंडर मुमताज आलम, टाइटन आई प्लस भीएलएस टाइम एंड विजन,कांके रोड, रांची के अनुपम सिन्हा ,विपिन सिंह, नकीब तथा अन्य कर्मचारियों ने सहयोग दिया. शिविर में आंख जांच के साथ-साथ लोगों का ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर तथा अन्य बीमारियों की भी जांच व इलाज किया गया.
मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ यूएस वर्मा ने बताया कि ब्लड शुगर या डायबिटीज भी आंख के रोगों को आमंत्रित करने में अग्रणीय स्थान लिए हुए हैं. इसीलिए समय-समय पर ब्लड शुगर के साथ-साथ ब्लड प्रेसर की जांच कराएं और नेत्र जांच भी समय-समय कराना जरुरी है. उन्होंने कहा कि आंख की रोशनी नहीं है, तो पूरी दुनिया अंधकारमय और निराशा पन जैसा लगने लगता है.
लोग अवसाद एवं डिप्रेशन के शिकार हो जाते है. इसीलिए आंख की रोशनी को बरकरार रखना अति आवश्यक है. आँख खराबी के शुरुआती दौर में आंख आना, आंख लाल हो जाना, सूजन होकर दर्द होना, खुजली होना, आंख से पानी गिरना, आंख का भेगा हो जाना, लकवा मार जाना, आंख की रोशनी कम होते जाना, नजदीक दृष्टि , दूर दृष्टि का दोष हो जाना देखा जाता है.
काला मोतिया भी आजकल अनेक लोगों में पाया जाने लगा है. जिससे सर में दर्द हमेशा बना रहता है. अभी मोतियाबिंद या कैटरेक्ट की बीमारी भी एक महामारी की तरह फैलते जा रहा है. बड़ों के साथ – साथ बच्चों में भी यह देखने को मिल रही है. छोटे बच्चों को भी दृष्टि दोष के कारण चश्मा लगाने की आवश्यकता पड़ रही है. यदि समय रहते इस पर ध्यान दिया जाए तो इससे बचा जा सकता है. यह जानकारी विवि के मीडिया प्रभारी अजय कुमार ने दी.
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