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अपनी और भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को मिशन के रूप में लेना होगा : मिथिलेश ठाकुर

युगांतर भारती के तत्वावधान में आयोजित पर्यावरण पंचायत में सरयू राय ने कहा- हमें पश्चिमी नहीं, भारतीय दृष्टिकोण के साथ काम करने की जरूरत

Ranchi : झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने कहा है कि हमें पर्यावरण संरक्षण को एक मिशन के रूप में लेना होगा, ताकि हम अपना और अपनी भावी पीढ़ी का भविष्य ठीक कर सकें. इसके लिए एक दृढ़ संकल्प के साथ पर्यावरण क्षेत्र में हम सभी को मिलकर काम करना है. मंत्री  सामाजिक संस्था युगांतर भारती के तत्वावधान में रांची विश्वविद्यालय के आर्यभट्ट सभागार में दामोदर बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष और विधायक सरयू राय की अध्यक्षता में ‘पर्यावरणीय संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग और पर्यावरण संरक्षण के कानूनी दृष्टिकोण‘ विषय पर एक दिवसीय ‘पर्यावरण पंचायत‘ कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे.  मिथिलेश ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा कि यह बहुत खुशी की बात है कि युगांतर भारती और इसकी सहमना संस्थाओं के सहयोग से पर्यावरण पंचायत का आयोजन किया गया है. इस तरह के पर्यावरण पंचायत का प्रत्येक कस्बों में आयोजन कर लोगों को जागरूक करना चाहिए.  उन्होंने कहा कि जिस तरह से लोग प्रकृति का दोहन कर रहे हैं, वह दिन दूर नहीं, जब हमारा जीना दूभर हो जायेगा. हम तो अपनी उम्र काट लेंगे लेकिन आनेवाली पीढ़ी इस धरती पर सांस भी नहीं ले पाएगी. विधायक सरयू राय का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि सरयू राय ने दामोदर नदी के प्रदूषण को दूर करने के लिए दामोदर बचाओ आंदोलन की शुरुआत की थी. आज काफी हद तक दामोदर नदी साफ हुई है. सभी लोगों को सरयू राय से प्रेरणा लेकर इस तरह का कार्य करना चाहिए. आज युगांतर भारती जैसी हजारों संस्थाओं की जरूरत है.  पर्यावरण को संरक्षित करते हुए प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और संवर्धन करना है, तभी ऐसे कार्यशालाओं की सार्थकता साबित होगी.

दामोदर बचाओ आंदोलन के अध्यक्ष और विधायक सरयू राय ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब तक जो कानून बने हैं, उससे ज्यादा कठोर कानूनों का बन पाना अब संभव नहीं है. सभी कानूनों के रहने के बावजूद भी पर्यावरण की स्थिति दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही है. इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करना बहुत आवश्यक है. सरकार की एक बड़ी जिम्मेदारी है कि वह इन कानूनों को लागू करे. सरकार ने इसके लिए कई संस्थान बनाये हैं, परंतु यह नहीं भूलना चाहिए कि इन संस्थानों के उच्च पद पर बैठे व्यक्ति योग्य होने चाहिए. उन्हें अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभानी होगी. उसे एक दृढ़ निश्चय करना होगा कि किसी भी हाल में वह पर्यावरण को प्रदूषित नहीं होने देगा. किसी उद्योग या प्रतिष्ठान को थोड़ा लाभ अधिक हो, इसके लिए पर्यावरण को प्रदूषित होने देना उचित नहीं है. श्री राय ने कहा कि वर्तमान समय में यह देखा जा रहा है कि पर्यावरण को प्रदूषित करने में सबसे बड़ा जिम्मेदार एक मेधावी मस्तिष्क का व्यक्ति ही होता जा रहा है, यदि इनका ही आचरण भ्रष्ट होगा तो कानून का उल्लंघन होगा और उद्देश्य कभी पूरा नहीं हो पाएगा. उन्होंने आह्वान किया कि अगर कानून लागू नहीं हो रहे हैं तो हमें कोर्ट की शरण में जाकर इसे लागू करवाना होगा.

विधायक सरयू राय ने कहा कि इस कार्यशाला के आयोजन का उद्देश्य है कि आम लोगों को पर्यावरण से संबंधित कानूनों की जानकारी दी जाये. जब पश्चिमी देशों ने पर्यावरणीय प्रदूषण व दोहन के दुष्प्रभाव को महसूस किया, तो उन्होंने 1972 में स्टॉकहोम में एक विश्वव्यापी पर्यावरण कांफेंस का आयोजन कर विश्व के देशों को पर्यावरण संबंधी कानून लागू करने पर सोचने के लिए मजबूर किया. नदियां जब गंदी होती है, तो उसे साफ करने का काम किया जाता है. लेकिन किस कारण से गंदगी फैल रही है, उसे जानने एवं गंदगी को रोकने का प्रयास नहीं किया जाता है. हमें नदी को साफ करने कि नहीं बल्कि यह संकल्प लेना चाहिए कि नदी को हम गंदा ही नहीं करेंगे, तो अपने आप ही नदियां साफ हो जायेगी, हमें पश्चिमी दृष्टिकोण के साथ नहीं, बल्कि भारतीय दृष्टिकोण के साथ पर्यावरण पर कार्य करना चाहिए. हमें अपनी जरूरतों को कम करना होगा और जो भी चीजें उपयोग कर रहे हैं, उनका फिर से उपयोग करने पर जोर देना चाहिए.  उन्होंने कहा कि पर्यावरण को लेकर हमें अपने भीतर भी एक संस्कार आत्मसात करना होगा. हमारे ऊपर एक बड़ी जिम्मेदारी है कि पर्यावरण को जिस रूप में हमारे पूर्वजों ने हमें सौंपा था, उसे उसी रूप में हम अपनी अगली पीढ़ी को दें, यह हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है.

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उद्घाटन सत्र के अपने संबोधन में मनोरंजन प्रसाद ने कहा कि पहले देश और दुनिया पर्यावरण संरक्षण के प्रति उतने सचेत नहीं थे, फिर भी वे संतुलित जीवन जी रहे थे. पहले लोगों के बीच पर्यावरण से संबंधित उस तरह की समस्याएं भी नहीं होती थीं. लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, तो ऐसी कई घटनाएं घटीं, जिसके बाद लोगों को पर्यावरण के प्रति गंभीर होने के लिए मजबूर कर दिया.  कार्यक्रम के विषय प्रवेश में उषा मार्टिन विश्वविद्यालय के कुलपति रमेश पांडेय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कोई भी गतिविधि करे तो सबसे पहले वह देखे की उसके इस गतिविधि से पर्यावरण पर क्या सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. ओंकार नाथ सिंह ने कृषि में खाद और कीटनाशक का अत्यधिक प्रयोग और इसके दुष्प्रभाव के बारे में बताया. जूलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के वैज्ञानिक डॉ गोपाल शर्मा ने पर्यावरणीय संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग एवं पर्यावरण संरक्षण विषय पर अपनी प्रस्तुति दी. उन्होंने कहा कि प्रकृति को मानव ने नहीं बनाया, लेकिन इसका दोहन मनुष्य के द्वारा किया जा रहा है और इसका दुष्प्रभाव भी मनुष्य पर ही पड़ेगा. विनोबा भावे के पूर्व कुलपति रमेश शरण ने कहा कि  समझने वाली बात यह है कि प्राकृतिक स्रोत का सबसे ज्यादा इस्तेमाल कौन कर रहा है, इसे सबसे अधिक प्रदूषित कौन कर रहा है एवं कौन लाभ ले रहा है. यह देखा गया है कि जिस स्थल पर खनन होता है, जहां उद्योग लगते है, वहीं के लोग सबसे अधिक गरीब होते हैं, जबकि बाहर से आए हुए लोग इस उद्योग और खनन का लाभ उठाते हैं. हमें समझना होगा कि जिस विकास के रास्ते पर हम चल रहे हैं, यह वास्तव में किसका विकास है और किसके लिए है.

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लाइफ, नयी दिल्ली के ट्रस्टी, राहुल चौधरी ने बताया कि आज पर्यावरण स्वास्थ्य सूचकांक में भारत का स्थान अंतिम पायदान से केवल तीन स्थान उपर है. उन्होंने पर्यावरण से संबंधित विभिन्न कानूनी पहलुओं की जानकारी दी. डॉ राकेश कुमार सिंह ने किसी मामले को एनजीटी में ले जाने से पहले आवश्यक सबूत संग्रह करने और उसे तैयार करने के संबंध में विस्तार से जानकारी दी.

उद्घाटन सत्र का विषय प्रवेश उषा मार्टिन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो रमेश पांडेय, स्वागत भाषण रांची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो कामिनी कुमार और धन्यवाद ज्ञापन युगांतर भारती के सचिव आशीष कुमार शीतल मुंडा ने किया. समापन सत्र का विषय प्रवेश रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ एमसी मेहता, स्वागत भाषण युगांतर भारती के कार्यकारी अध्यक्ष अंशुल शरण तथा धन्यवाद ज्ञापन नेचर फाउंडेशन के ट्रस्टी निरंजन कुमार सिंह ने किया. तकनीकी सत्र-1 की अध्यक्षता प्रो रमेश पांडेय, प्रो रमेश शरण और डॉ गोपाल शर्मा तथा तकनीकी सत्र-2 की अध्यक्षता प्रो मनोरंजन प्रसाद सिन्हा, राहुल चौधरी और डॉ आरके सिंह ने की. कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस के राज्य समन्वयक डॉ ब्रजेश कुमार, मुकेश कुमार, शिवानी कुमार, पुष्पा टोपनो, ब्रजेश कुमार, ब्रजनंदन कुमार, मुकेश सिंह, अंगद मुंडा, राजेश सिन्हा, रिक्की केशरी, पवन कुमार का योगदान रहा. मंच संचालन सुश्री भारती ओझा ने किया.

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