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झारखंड में बनेगी बिजली पर मिलेगी बांग्लादेश को, अब तक नहीं हो पाया है एमओयू

  • -एमओयू होने पर बिजली उत्पादन का 25 प्रतिशत हिस्सा झारखंड को मिलता
    -2 यूनिट 800- 800 के होंगे कुल उत्पादन 1600 मेगावाट का होगा

Ranchi: झारखंड के गोड्डा जिले में अडानी ग्रुप के द्वारा 800- 800 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिये दो पावर प्लांट बनाये जा रहे हैं. अडानी ने इसके लिये बांग्लादेश की सरकार के साथ 2016 में एमओयू किया था. बिजली गोड्डा से बनाकर बांग्लादेश भेजी जानी है. वहीं झारखंड सरकार के ऊर्जा विभाग और अडानी समूह के बीच एमओयू होना था जिसके तहत कुल उत्पादित बिजली का 25 प्रतिषत हिस्सा झारखंड को मिलना था. यह एमओयू 2020 के अक्टूबर तक ही कर लिया जाना था, जो अब तक नहीं किया गया है.

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अडानी समूह और झारखंड सरकार के बीच अक्टूबर तक होना था एमओयू, जो अबतक नहीं हुआ

विभाग की इस सुस्ती का परिणाम यह होगा कि झारखंड में बिजली का उत्पादन होगा. राज्य के संसाधनों के उपयोग भी होगा, लेकिन पूरी की पूरी बिजली बांग्लादेश चली जाएगी. बिजली की कमी झेल रहे राज्य के लोगों को सिर्फ विभागीय सुस्ती के कारण 25 प्रतिशत बिजली नहीं मिल पाएगी. पर विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अडानी पावर प्लांट से एमओयू का मामला अभी विचाराधीन है. उम्मीद है कि जल्द ही काम पूरा हो जायें.

राज्य में सप्लाई के लिए बाहर से खरीदी जाती है बिजली

राज्य में प्रतिदिन बिजली डिमांड लगभग 1300 मेगावाट है. पीक ऑवर में ये 1600 मेगावाट तक रहती है. जबकि राज्य में बिजली उत्पादन के अपने स्रोतों में मात्र सिकिदरी हाईडल प्लांट और टीटीपीएस है. इनमें सिकिदरी से 120 मेगावाट बिजली और टीटीपीएस 275 मेगावाट तक ही बिजली मिलती है. सिकिदरी का एक प्लांट पिछले एक साल से बंद है. वहीं डीवीसी, आधुनिक, इंलैंड समेत अन्य

कंपनियों से बिजली खरीदी जाती है.

सिर्फ सेंट्रल पूल से राज्य को सात सौ मेगावाट तक बिजली मिलती है. ऐसे में ये एमओयू हो जाने से लगभग 400 मेगावाट बिजली राज्य को मिलेगी. जो कि 1600 मेगावाट का 25 प्रतिशत है. ये एमओयू नहीं किया जाता है तो 400 मेगावाट बिजली भी राज्य अपने स्रोत से नहीं ले पायेगा. जिससे फिर से जेबीवीएनएल बिजली जेनरेटर कंपनियों के बकाया में फंस सकती है.

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15000 करोड़ का हो रहा निवेश, अडानी को 900 एकड़ जमीन मिली

पावर प्लांट के लिये अडानी समूह 15000 करोड़ रुपये निवेश कर रहा है. गोड्डा में इसके लिये 900 एकड़ जमीन राज्य सरकार ने दी है. जहां प्लांट बनाया जा रहा है. एक अनुमान है कि इस प्लांट में अलग अलग प्रखंडों के लगभग 841 परिवारों को विस्थापित किया गया. प्लांट के लिये मोतिया, गंगटा गोविंदपुर, पटवा, पौड़ेयाहाट, गायघाट और सोनाडीह में जमीन ली गयी है. वहीं इस प्लांट के लिये चार एजेंसियां काम कर रही है. जिसमें ब्रिज एंड रूफ, सिंप्लेक्स, सेप्को और आरसी कंपनी काम कर रही है.

क्या कहते हैं ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार

ऊर्जा सचिव अविनाश कुमार ने कहा कि अडानी पावर प्लांट से एमओयू का मामला अभी विचाराधीन है. उम्मीद है कि जल्द ही काम पूरा हो जाये. अक्टूबर में ही एमओयू होना था. लेकिन कोरोना वायरस के कारण लागू लॉकडाउन के कारण काम में देरी हुई है.

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