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LED बल्ब बेचने वाली EESL कंपनी अब 36 हजार की AC 41 हजार में बेचेगी

Girish Malviya

EESL कम्पनी पर जरा नजरें बनाए रखिए.…यही कम्पनी है जो आपको लगभग 36 हजार में आने वाला AC 41 हजार तीन सौ में बेचने वाली है, जिसके लिए उसने टाटा की वोल्टास कंपनी से 50 हजार  का 5 स्टार AC खरीदने का ऑर्डर दिया हुआ है… यही कम्पनी है जिसने उजाला योजना के अंतर्गत आपको LED बल्ब बेचे हैं… यही कम्पनी है जिसके स्मार्ट मीटर आपके घर में लगने वाले हैं,…. यही कम्पनी है जो आपके शहर में स्ट्रीट लाइट लगवा रही है…यही कम्पनी है जो आने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए पेट्रोल पंप जैसे चार्जिंग स्टेशन लगवाने वाली है….

EESL कोई प्राइवेट कंपनी नहीं है, बल्कि एक सरकारी कम्पनी है विद्युत मंत्रालय ने एनटीपीसी लिमिटेड, पीएफसी, आरईसी और पावरग्रिड के साथ मिलकर एक संयुक्त उद्यम ऊर्जा दक्षता सेवा लिमिटेड (EESL) की स्थापना की है. जिसका उद्देश्य ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं के कार्यान्वयन की सुविधा प्रदान करना है, इस वक्त सरकारी कृपा पाकर EESL विश्व की सबसे बड़ी पब्लिक एनर्जी सर्विस कंपनियों में से एक है.

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EESL भारत सरकार ने 2009 में बनाई थी. लेकिन इस कंपनी ने 2014 तक कोई काम नहीं किया. कंपनी सिर्फ कागज तक ही सीमित रही, जैसे ही जून 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आयी और पीयूष गोयल को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री बनाया गया. अचानक इस कंपनी को देश के 100 शहरों में एलईडी बल्ब बेचने का काम दे दिया गया, जिसे बाद में उजाला योजना कहा गया.

लेकिन EESL में वह क्षमता नहीं थी कि उसे इतना बड़ा काम दिया जाये, क्योंकि कंपनी के पास कोई इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं था. यह कंपनी न तो एलईडी का उत्पादन करती है और न ही उसके पास एलईडी बल्ब लगवाने का कोई साधन ही था.

वह चाइना से बल्ब की थोक खरीदकर दूसरी छोटी कंपनियों को सब-कांट्रेक्ट देकर एलईडी बल्ब बिकवाने लगी. लेकिन LED बल्ब तो उसने फिर भी अपेक्षाकृत कम कीमत पर बेचे, लेकिन AC के बारे में आप ऐसा नहीं कह सकते…

जब उजाला योजना चल रही थी, तब EESL ने सस्ते Ac बेचने की बात करना शुरू कर दी थी. जब इनवर्टर एयर-कंडीशनर :1.5 टन: की खरीद के लिये EESL ने पहली निविदा जारी की, तब बताया गया कि इसका खुदरा मूल्य 30,000 रुपये प्रति इकाई होगा. जबकि बाजार मूल्य 37,000 रुपये के लगभग है (नवभारत टाइम्स का लिंक देखिए) लेकिन अब वह इसे 30 हजार के बजाए 41,500 में बेचने की बात कर रही है.

जबकि 50 हजार AC बल्क में खरीदने का फायदा उसे जनता को देना चाहिए था… यदि 1 AC की खरीद में 2000 रु की कमीशनबाजी हुई है, जो कि साफ दिख रहा है. तो यह कितना बड़ा घोटाला हो सकता है, अगर आप सोच रहे हैं कि यह Ac कौन खरीदेगा तो आप गलत हैं, इतने Ac तो सरकारी कार्यालयों में ही लगा दिये जाएंगे…

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लेकिन बात सिर्फ LED और AC की होती तो भी ठीक था. इस कम्पनी को देशभर के शहरों में नगर निगम ने, राजमार्ग परिवहन मंत्रालय ने स्ट्रीट लाइट लगाने का ठेका दिया है, अगर आप गूगल पर EESL और स्ट्रीट लाइट वर्ड सर्च कीजिए, आपको स्थानीय अखबारों की ऐसी सैकड़ों लिंक मिलेगी, जिसमें यह कहा गया है कि कंपनी ठीक से अपना काम नहीं कर रही हैं  या कम्पनी भाग गयी है.

जोधपुर भास्कर की एक खबर है कि EESL ने चोरी चली गयी स्ट्रीट लाइट बदलने से इनकार कर दिया, क्योंकि दिए गए ठेके में यह शर्त है कि यदि स्ट्रीट पोल लाइट की एलईडी चोरी हो जाए तो वापस नई लगने की जिम्मेदारी led लगवाने वाले निगम व EESL कंपनी की नहीं होगी.

चोरी हुई लाइट की पहले तो पुलिस में एफआईआर दर्ज करवानी होगी, जबकि पुलिस सिर्फ गुमशुदगी ही दर्ज करती है, इसकी क्लोजर रिपोर्ट मिलने के बाद इंश्योरेंस कंपनी से क्लेम पास होने की प्रक्रिया है. इस लंबी व अत्यंत उलझी प्रक्रिया के चलते जोधपुर शहर में 2 साल में चोरी हुई 1000 से ज्यादा एलईडी में 700 से ज्यादा दोबारा नहीं लग पायी हैं.

यह तो एक शहर का हाल बताया है देश के हर छोटे बड़े शहर में इस EESL कम्पनी ने ऐसे ठेकेदारों को सब कांट्रेक्ट दिया है, जो अपना काम ठीक से नहीं कर रहे हैं, जिसकी जिम्मेदारी EESL की है.

इलेक्ट्रिक कार और स्मार्ट मीटर की बात फिर कभी क्योंकि पोस्ट बहुत लम्बी हो रही है. लेकिन एक बात समझ लीजिए जब भी BSNL, एयरइंडिया और रेलवे जैसे संस्थानों के निजीकरण की बात की जाती है, मोदी समर्थक कहते हैं कि सरकार का काम ऐसे संस्थान चलाना नहीं है…

लेकिन जब ऐसी सरकारी कम्पनी गठित की जाती है, जो न कोई उत्पाद बनाती है न उसके पास देश भर में वितरण और मेंटनेंस की कोई व्यवस्था है, सब काम ठेके पर करवाए जा रहे हैं तो मोदी समर्थकों के मुंह पर ताला लग जाता है…

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