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यही हाल रहा तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिल जायेगा “वॉक ओवर”

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Surjit Singh

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“वॉक ओवर”. क्रिकेट, फुटबॉल में इस्तेमाल होने वाला यह शब्द अब झारखंड के राजनीतिक हलकों में इस्तेमाल होने लगा है. वजह है विधानसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष (भाजपा-आजसू) और विपक्ष (झामुमो, कांग्रेस, जेवीएम व राजद) की तैयारी. कहा जा रहा है कि क्या विपक्षी दल ने सत्ता पक्ष को वॉक ओवर देना तय कर लिया है. दिसंबर में रघुवर सरकार का कार्यकाल खत्म होगा. उसी माह चुनाव होंगे.

सत्ता पक्ष और विपक्ष की तैयारी को देख कर कोई भी कह सकता है कि भाजपा को दोबारा सत्ता आने में परेशानी नहीं होने वाली है. सत्ता पक्ष की तैयारियों की बात करें, तो लोकसभा चुनाव के तुरंत बाद या यूं कहें चुनाव के दौरान से ही मुख्यमंत्री रघुवर दास विधानसभा की तैयारियों में जुट गये हैं.

संथाल परगना पर विशेष ध्यान दे रहे हैं. दौरा कर रहे हैं और मुख्य विपक्षी दल झामुमो के हेमंत सोरेन और उनके परिवार पर लगातार निशाना साध रहे हैं. पार्टी के सांसद, विधायक व प्रवक्ता भी लगातार सक्रिय हैं. 10 जुलाई को अखबारों में खबर है कि 13 जुलाई को भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा झारखंड आ रहे हैं. वह यहां चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे.

विपक्षी दलों की बात करें, तो अभी गठबंधन की बैठकों की तारीखें तय होती हैं. बैठकें भी होती हैं. फिर अगली बैठक की तारीख तय कर ली जाती है.

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झारखंड का मुख्य विपक्षी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) है. इसके अध्यक्ष शिबू सोरेन बुजुर्ग हो चुके हैं. कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन हैं. जो क्षेत्र का दौरा तो खूब करते हैं. सोशल मीडिया में भी सक्रिया नजर आते हैं, पर लोगों से खुद को कनेक्ट नहीं कर पाते. वह जो कहना चाहते हैं, जो कह रहें होते हैं, उसे झारखंड के हर हिस्से तक पहुंचा नहीं पा रहे.

वह खुद को एक खास घेरे से बाहर निकालने और पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं से जुड़ने में भी विफल रहे हैं. चुनाव को लेकर इस दल की गतिविधि की बात करें, तो एक सुप्रियो भट्टाचार्य कभी-कभार मीडिया में आते हैं. बाकी कहां हैं, कोई नहीं जानता.

विपक्ष में दूसरा महत्वपूर्ण दल कांग्रेस है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार हैं. वह कब कहां रहेंगे, कोई नहीं जानता. प्रदेश कार्यालय भी कम ही जाते हैं. हाल-फिलहाल तो यह भी सुनने में आया कि अब वह अपने कुनबे के लोगों के साथ बैठकें भी होटल में ही करने लगे हैं. एक तरह से देखा जाये तो कांग्रेस अपने कार्यालय में हंगामे और होटल के बंद कमरे की राजनीति में व्यस्त है.

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इस दल के पास मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरने और जनता से जुड़ने का माद्दा तो है, पर उसके नेता यह सब करना भूल चुके हैं. चुनाव को लेकर यह दल खुद को तैयार ही नहीं कर पा रहा है.

विपक्ष का तीसरा दल जेवीएम हैं. इसके प्रमुख बाबू लाल मरांडी हैं. लगातार हार के बाद कहा जाने लगा है कि अब यह पार्टी खत्म होने वाली है. बाबू लाल मरांडी का राजनीतिक कैरियर द इंड हो चुका है. उनमें संगठन बनाने की क्षमता है. कैंडिडेट को जिताने की भी क्षमता है. पर, अब कोई जीतने वाला कैंडिडेट उन पर दांव खेलेगा, इसमें शक है. इस दल के कद्दावर नेता विधायक प्रदीप यादव पार्टी के ही महिला नेत्री के साथ किये गये गलत व्यवहार करने के बाद भागे-भागे फिर रहे हैं. कुल मिलाकर इस दल की कोई चुनावी तैयारी देखने को नहीं मिल रही.

विपक्ष का चौथा दल है राजद. इसके सबसे बड़े नेता तेजस्वी यादव सीन से गायब हैं और झारखंड में यह पार्टी टूट चुकी है. ऐसी स्थिति में राजद चुनाव को लेकर खुद को तैयार कर पायेगा, यह ख्याली पुलाव या चर्चा की बात तो हो सकती है, लेकिन सच में ऐसा कुछ होगा या चुनाव में इसके प्रत्याशी कोई जलवा दिखा पायेंगे, यह असंभव सा है.

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