
Ranchi : भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने गुरुवार को लातेहार में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हेमंत सोरेन पर राज्य की स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को उपेक्षित रखने का आरोप लगाया.
प्रतुल ने कहा कि हेमंत सोरेन का यह आरोप हास्यास्पद है कि राज्य सरकार स्थानीय और जनजातीय भाषाओं को तरजीह नहीं दे रही है.
प्रतुल ने हेमन्त को याद दिलाया कि जब वह मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने जेपीएससी की परीक्षा में स्थानीय और जनजातीय भाषाओं के वेटेज परसेंटेज को कम कर दिया था.
रघुवर दास ने मुख्यमंत्री बनने के बाद तुरन्त हेमंत सरकार के इस आदिवासी मूलवासी विरोधी निर्णय को निरस्त करते हुए जेपीएससी परीक्षा में स्थानीय और जनजातीय भाषा के पुराने वेटेज को बहाल किया था.
हेमंत सोरेन की सरकार ने जेपीएससी में सीसैट प्रणाली को लागू कर दिया था जो कि आदिवासी-मूलवासी विरोधी थी.
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रघुवर सरकार ने ट्राइबल रीजनल लैंग्वेज डिपार्टमेंट में 29 नये पद किये सृजित
प्रतुल ने कहा कि रघुवर सरकार ने ट्राइबल रीजनल लैंग्वेज डिपार्टमेंट में 29 नये पदों को सृजित किया. 3.58 करोड़ की लागत से नये भवन का भी निर्माण हो गया है.
2.5 करोड़ के फंड की अलग व्यवस्था की गयी है ताकि विभाग का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर हो सके और जो शोधकर्ता अपनी किताबें या शोध पब्लिश कराना चाह रहे हैं, उन्हें भी सहायता मिल सके.
अलग-अलग भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार के निर्देश पर स्थानीय भाषाओं के 9 अलग विभागों की भी संरचना हुई.
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चुनाव में अपना सफाया देख कर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं हेमंत
उन्होंने कहा कि वास्तविक रूप में स्थानीयता के मुद्दे पर राजनीति करने वाले हेमंत सोरेन ने ना तो स्थानीय नीति को परिभाषित किया था. ना ही यहां के आदिवासी मूल वासियों के विकास के लिए कोई कदम उठाया.
अब चुनाव में अपना सफाया देख कर अनर्गल आरोप लगा रहे हैं.
प्रतुल ने कहा भाजपा को यह नहीं पता है कि हेमंत सोरेन ने 14 महीने के अपने कार्यकाल में स्थानीय भाषाओं के विकास के लिए कुछ भी किया है. अगर उन्होंने किया है तो वह सार्वजनिक रूप से बतायें भी.
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