
Ranchi: हजारीबाग के चौपारण इलाके में शौकत अली और शेरखान अफीम की तस्करी में जुटा है. इलाके में घनघोर जंगल में आदिवासियों के जरिये अफीम की खेती की जाती है. अफीम से होने वाली कमाई का इस्तेमाल नक्सली करते है. इसका खुलासा जयपुर क्राइम ब्रांच और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अजमेर की टीम के हत्थे चढ़े दो आरोपी ने किया है.
टीम ने बीते गुरुवार को दौसा के सिकंदरा थाना क्षेत्र में बारह चक्का ट्रक में लदे करीब 12 किलो की हाई क्वालिटी की अफीम जब्त की थी. करीब 60 लाख रुपये की अफीम के साथ दो आरोपी रोशन लाल जाट और अनिल कुमार तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया. आरोपी ने पुलिस को पुछताछ में बताया कि वह कई बार झारखंड से ही मादक पदार्थ लेकर जा चुका है. सीआईडी क्राइम ब्रांच जयपुर की टीम आरोपी पर पिछले 3 माह से नजर रखे हुए थी. दोनों आरोपी इलाके में किसी बड़े तस्कर को बेचते थे.
नक्सल प्रभावित इलाके में होती है अफीम की खेती
नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले इलाके खूंटी, गुमला, लातेहार, चतरा सहित अन्य इलाको में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती की जाती है. अफीम की खेती करने वाले लोगों ने एक सोची समझी साजिश के तहत नक्सल प्रभावित इलाकों में फसल लगाते है ताकि वे बिना रोक-टोक के धंधा कर सके. कारण यह कि इस धंधे में पैसा ही पैसा है. बेखौफ होकर नक्सल प्रभावित इलाके में अफीम की खेती की जाती है.
पुलिस उनके गढ़ तक पहुंचने की हिमाकत नहीं करती. अधिकांश इलाके में अफीम की खेती के लिए बीज से लेकर पूंजी तक नक्सली ही मुहैया कराते हैं. पैसे के लालच और डर से गरीब किसान उनके झांसे में आकर इस धंधे से जुड़ जाते हैं. नशे की इस खेती को रोकना पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया है. जंगली इलाकों में उग्रवादियों के संरक्षण में फल-फूल रहे इस अवैध धंधे तक पहुंचना पुलिस के लिए आसान नहीं है. हालांकि बीच-बीच में कई स्थानों पर अभियान चलाकर अफीम की खेती नष्ट भी की गई है.
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