
New Delhi : भारत ने मंगलवार को छोटी दूरी वाले एक मिसाइल ‘वर्टिकली लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल’ (VL-SRSAM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) ने जमीन से हवा में मार करने वाली इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के तट से कुछ दूर चांदीपुर में किया. भारतीय नौसेना ने इसे तैयार किया है.
Vertical Launch Short Range Surface to Air Missile launched to validate integrated operation of weapon system components including the vertical launcher with controller, canisterised flight vehicle and weapon control system. https://t.co/eAuE30IHhd pic.twitter.com/P8DvwEWWAl
— DRDO (@DRDO_India) December 7, 2021
इस बारे में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस मिसाइल को वर्टिकल लांचर से कम दूरी की सतह से लांच किया गया. यह मिसाइल लगभग 15 किमी की दूरी पर स्थित दुश्मन के टारगेट को खत्म कर सकती है. परीक्षण के दौरान DRDO व नौसेना के अधिकारी भी इस परीक्षण के दौरान मौजूद रहे. इसी साल 22 फरवरी को इसका पहला परीक्षण किया गया था.
VL-SRSAM को भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है, जिसका उद्देश्य समुद्री-स्किमिंग टारगेट सहित सीमा पर विभिन्न हवाई खतरों को बेअसर करना है. परीक्षण के दौरान मिसाइल की उड़ान, उसके पथ और अन्य आंकड़ों, मानदंडों को रिकॉर्ड किया गया.’ मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल की प्रणाली ने आशा के अनुरुप काम किया. इस परीक्षण को देखने के लिए DRDO और भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी भी चांदीपुर में मौजूद रहे.
इस मिसाइल की रेंज 50 से 60 किलोमीटर है और ये जमीन से ही हवा में मार कर सकती है. दूसरे शब्दों में हवा से आने वाले खतरे को इस मिसाइल के जरिए हवा में ही नष्ट किया जा सकता है. इस मिसाइल को नौसेना के युद्धपोतों पर तैनात किया जाएगा .
RM Shri @rajnathsingh has congratulated @DRDO_India , @indiannavy and the industry for the successful flight test of Vertical Launch Short Range Surface to Air Missile. He said that this system would further enhance defence capability of Indian Naval Ships against aerial threats. pic.twitter.com/chnlpP3ct7
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) December 7, 2021
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफल परीक्षण पर DRDO, नेवी और प्रोजेक्ट से जुड़े सभी लोगों और संगठनों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि यह मिसाइल प्रणाली हवाई खतरों के खिलाफ भारतीय नौसेना की क्षमता को और मजबूत बनाएगी. डीआरडीओ के प्रमुख जी. सतीश रेड्डी ने भी परीक्षण में शामिल वैज्ञानिकों को इसके लिए बधाई दी.




