JharkhandRanchi

सीड व संवाद की कार्यशाला में चर्चा , जन स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे सरकार, वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाये

Ranchi : सेंटर फॉर एन्वॉयरमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) एवं संवाद ने वायु प्रदूषण से पैदा होने वाले स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों पर केंद्रित सार्वजनिक विमर्श सत्र आयोजित किया, जिसमें सरकार से अविलंब इस समस्या में सुधार लाने के लिए अपील की गयी. यह कार्यशाला वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाने तथा निवारण संबंधी उन कदमों पर चर्चा के लिए समर्पित रही, जो आम लोग वायु प्रदूषण जनित स्वास्थ्य संबंधी खतरों को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए उठा सकें.

कार्यशाला में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने शहर में हवा के खराब स्तर के कारण जन स्वास्थ्य पर आ रहे खतरों को रोकने के विविध उपायों को रेखांकित किया और राज्य सरकार से अपील की कि वह गंभीर वायु प्रदूषण वाले दिनों में नियमित रूप से ‘हेल्थ एडवायजरी’ यानी स्वास्थ्य संबंधी परामर्श सूचनाएं जारी करे, और इसी अनुरूप प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर ‘पब्लिक हेल्थ डिस्पले बोर्ड’ लगाये तथा राज्य में वायु प्रदूषण के स्तर को मापने तथा निगरानी के लिए मॉनिटरिंग और क्षमता वर्द्धन संबंधी ठोस कदम उठाये.

इसे भी पढ़ें – मोदी सरकार ने शहीदों के बच्चों की बढ़ायी स्कॉलरशिप और रघुवर सरकार ने पुलवामा शहीदों को ठगा

मजबूत और एकीकृत कदम उठाने की आवश्यकता

कार्यशाला में सीड की सीनियर प्रोग्राम ऑफिसर अंकिता ज्योति ने बताया कि ”राज्य में वायु प्रदूषण के खतरे से निबटने तथा जन स्वास्थ्य के संकट को रोकने के लिए मजबूत और एकीकृत कदम उठाने की आवश्यकता है. झारखंड के शहरी परिदृश्य में वायु गुणवत्ता की खराब स्थिति को देखते हुए हमें एक ऐसे ठोस फेमवर्क की जरूरत है, जहां नीति निर्माण में सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं और परिस्थितियों को अनिवार्य ढंग से संलग्न किया जाना चाहिए.

एक ओर जहां वायु प्रदूषण के उद्गम स्रोतों को रोकने के लिए प्रभावी नीतियों को स्पष्ट प्राथमिकता मिलनी चाहिए, वहीं दूसरी ओर वायु प्रदूषण के एक्सपोजर और स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों को कम करने में व्यक्ति विशेष व लोगों के प्रभावी कदमों का भी अपना महत्व है.उच्च वायु प्रदूषण स्तर वाले दिनों में परिवेशी वायु प्रदूषण से एक्सपोजर को कई कदमों से कम किया जा सकता है.

इसे भी पढ़ें – NEWS WING IMPACT: DC रांची ने बनायी पूर्व DGP डीके पांडेय की पत्नी की जमीन जांचने के लिए कमेटी, मंत्री ने कहा-कोई भी हो कानून से ऊपर नहीं

वायु प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों का सार्वजनिक क्षेत्र में अभाव

पर्यावरणविद डॉक्टर नीतीश प्रियदर्शी ने कहा कि राज्य में वायु प्रदूषण से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों से जुड़े शोध-अध्ययन तथा वायु प्रदूषण से जुड़े आंकड़ों का सार्वजनिक क्षेत्र में भारी अभाव है. डॉ सुरेश अग्रवाल ने वायु प्रदूषण जनित स्वास्थ्य संकट के विषय पर सार्वजनिक विमर्श की प्रशंसा की और कहा कि ”यह सही दिशा में उठाया गया अनिवार्य कदम है, जो निश्चय ही सकारात्मक पहल को प्रोत्साहित करेगा. वायु प्रदूषण पर जनजागरूकता ऐसे सार्वजनिक विमर्श से ही बढ़ेगी.

एयर पॉल्यूशन के एक्सपोजर को कम करने के लिए लोगों को वायु प्रदूषक तत्वों के संपर्क में आने से बचना बहुत जरूरी है, खासकर बच्चों और बूढ़ों समेत उन लोगों के लिए जो दीर्घकालिक रूप से हृदय व छाती संबंधी बीमारियों यानी कार्डियोवेस्कुलर या पल्मोनरी डिजीज से पीड़ित है.”

इसे भी पढ़ें – बिजली वितरण व्यवस्था निजी क्षेत्र को सौंपने पर ही निर्बाध बिजली संभव: महेश पोद्दार  

जन स्वास्थ्य के मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत

इस मौके पर संवाद के घनश्याम ने कहा कि ”जब हम वायु प्रदूषण नियंत्रण की बात करते हैं तो जन स्वास्थ्य के मुद्दे पर सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है और यह महत्वपूर्ण है कि इसे साझा तथा ठोस कदमों की श्रेणी में प्राथमिकता के रूप में रखा जाये.  परिचर्चा में भागीदार विशेषज्ञों ने एयर पॉल्युशन से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी सूचनाओं में सुधार के लिए एक समन्वयकारी एप्रोच की जरूरत पर बल दिया.

सीड ने सरकार से रांची के लिए ‘क्लीन एयर एक्शन प्लान’ तैयार करने की अपील की तथा जल्द से जल्द शहर में वायु गुणवत्ता के मॉनिटरिंग सिस्टम में सुधार लाने पर बल दिया.

Related Articles

Back to top button