
Ranchi: सरना यूथ वेलफेयर ग्रुप और आदर्श आदिवासी विकास सरना समिति के संयुक्त तत्वावधान में बीर बुधु भगत आदिवासी हॉस्टल, हातमा में आज धुमकुड़िया-2020 का आयोजन किया गया.
यह इन संस्थाओं का वार्षिक आयोजन है जो दिसंबर माह में आयोजित किया जाता है. पिछले चार दिनों से वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के द्वारा विभिन्न आदिवासी मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे जिसे देश भर से युवा जुड़े थे और प्रत्येक दिन इसे दस हजार से अधिक युवाओं ने उक्त कार्यक्रम को देखा और अपनी प्रतिक्रिया दी, अपने विचार, मंतव्य रखे.
इसमें शिक्षा के अलावा विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ व जानकार युवा विद्वानों ने अपने-अपने विचार ऱखे. अनुज लुगुन ने आदिवासी साहित्य संबंधित विचार रखे और युवाओं को अधिक से अधिक लिखने पर बल दिया.
आज का दिन उक्त कार्यक्रम का समापन दिवस था. इसमें भी आदिवासी युवाओं ने समाज की विभिन्न समस्याओं और मुद्दों पर अपने विचार रखे. आदिवासी पारंपरिक विधि विशेषज्ञ सहायक प्राध्यापक रामचन्द्र उरांव ने आदिवासी जीवन संबंधी विविध कानूनों की जानकारी दी और युवाओं से आग्रह किया कि आदिवासी परंपरा व कानून आदि की बारे जागरूक बनें.
कोल्हान में दो दर्जन से अधिक डिजिटल लाइब्रेरी आदिवासी इलाके में स्थापित कर चुके संजय कच्छप ने कहा कि धुमकुड़िया आदिवासियों की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था थी उसे अब लाइब्रेरी और वाचनालय के रूप में विकसित किया जा सकता है और युवाओं को वर्तमान सामाजिक चुनौतियों सामना करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है.
दिल्ली से आये अर्थशास्त्र के प्राध्यापक बलभद्र बिरूवा ने युवाओं को आर्थिक समस्याओं को जमीनी स्तर पर निपटने के उपाय सुझाये, जबकि रान्धो देवगम ने युवाओ को प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के लिए टिप्स व सुझाव दिए.
महादेव टोप्पो ने इस अवसर के लिए विशेष रूप से युवाओं को संबोधित अपनी लंबी कविता- “धुमकुड़िया में फिर दीया जला रहे हैं” – का पाठ किया. कविता के माध्यम से युवाओं को आधुनिक विज्ञान, तकनीक व ज्ञान के साथ आदिवासी परंपरा के मूल्यों, आदर्शों, परंपरा, विरासत के बीच सामंजस्य बिठाने पर बल दिया. प्राध्यापक रामकिशोर भगत ने अपनी भाषा, संस्कृति, इतिहास, परंपरा को बचाने का आह्वान किया.
इनके अलावा संजय कुजूर, डॉ. राजेन्द्रनाथ भगत, सुशीला लकड़ा, सोमनाथ भगत, संजीव भगत, अजय केरकेट्टा, कमला लकड़ा, प्रभाकर कुजूर ने भी अपने विचार रखे. इन्द्रजीत भगत, धुमकड़िया बेजांग, धुमकुड़िया कोटाम, मेरले लूरकुड़िया, लोहरदग्गा की टीमों ने इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया.
इन टीमों को आयोजकों की ओर से पुरस्कृत किया गया. उक्त अवसर पर धुमकुड़िया -2020 स्मारिका का भी लोकार्पण किया गया. कार्यक्रम का संचालन शिल्पी उरांव, अंजली उरांव, विपिन तिर्की एवं मुकुल तिर्की ने किया.




