
Dhanbad : बीसीसीएल के एरिया एक से पांच तक रंगदारी मांगे जाने के कारण कोयले का उठाव लगभग चार महीने से बंद है. व्यवसायियों का कहना है कि विधायक ढुल्लू महतो के समर्थक कोयला लोडिंग के लिए 1250 रुपये प्रति टन की दर से रंगदारी की मांग कर रहे हैं. रंगदारी मांगे जाने के कारण व्यवसायी यहां से कोयले का उठाव नहीं कर पा रहे हैं, जिससे व्यपारियों को परेशानी तो हो ही रही है.
साथ ही लोडिंग प्वाइंट पर काम कर रहे मजदूरों के समक्ष भी भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. इससे पहले रंगदारी के रूप में ढुल्लू समर्थक प्रति टन 650 रुपये की मांग करते थे. अब वे 1250 रुपये प्रति टन रंगदारी की मांग कर रहे हैं. जब से ढुल्लू समर्थक 1250 रुपये रंगदारी की मांग करने लगे हैं, तब से व्यापारियों ने बीसीसीएल के एक नंबर से पांच नंबर तक कोयले का उठाव बंद कर दिया है.
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
व्यवसायी संगठनों की ओर से विधायक की शिकायत पीएमओ तक की गयी थी. पीएमओ को शिकायत करने के बाद गह मंत्रालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया और मामले में हस्तक्षेप किया. मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन ने और पुलिस ने महज औपचारिकता दिखाते हुए उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच करायी. जिले के तत्कालीन उपायुक्त को जांच रिपोर्ट सौंपी गयी थी. जिला प्रशासन द्वारा सौंपी गयी रिपोर्ट में भी रंगदारी की बात सामने आयी इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गयी. बताया जाता है कि बाघमारा विधायक ढुल्लू महतो का सिक्का पूरे क्षेत्र में चलता है. जिला प्रशासन की रिपोर्ट जब सामने आयी तो विधायक ढुल्लू ने इस मामले को दबाने के लिए एक सुझाव दे डाला. उन्होंने रिपोर्ट में लगाये गये सभी आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि मजदूरों का भुगतान बेंक खाते से किया जाये.
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मारा जा रहा है मजदूरों का हक
न्यूज विंग की टीम ने जमुनिया आकाशकिनारी, बेनीडीह के मजदूरों से इस मामले में जानकारी इकट्ठी की. मजदूरों ने बताया कि पहले कोयले के लोडिंग के लिए 200 रुपये प्रति टन से 250 रुपये प्रति टन मजदूरी मिलती थी. एक ट्रक कोयला लादने में 8 से 10 मजदूरों की जरूरत पड़ती थी. इस कार्य में 5 से 8 घंटे का वक्त लगता था. एक ट्रक पर 20 टन के आसपास कोयले की लोडिंग होती थी. जिससे कोयला लोडिंग करने वाले मजदूरों को 400 से 500 रुपये की मजदूरी हो जाती थी. लेकिन पिछले चार महीने से यह भी बंद है. मजदूरों के अनुसार कोयले की लोडिंग के लिए व्यवसायी 650 रुपये प्रति टन के हिसाब से भुगतान करते थे. मतलब साफ है कि मजदूरों के हक में पहले भी सेंधमारी की जाती थी, जिसमें बाकी का पैसा ढुल्लू समर्थक और उनके मुखिया को जाता था.
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