
- जब बिगड़ रही स्थिति तब पहुंच रहे टेस्ट कराने
- रिपोर्ट पॉजिटिव आने के साथ खराब हो रही है स्थिति
- सैंपल देने के 8 दिन बाद भी रिपोर्ट का है इंतजार
Ranchi : कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. नये मरीजों में ज्यादातर मरीज सिंप्टोमैटिक हैं. इसके बावजूद सिटी के लोग सिंप्टम्स होने के बावजूद इसे छिपा रहे हैं. इतना ही नहीं टेस्ट कराने के बजाय घरों में रह कर इलाज कराने में अपना समय बर्बाद कर रहे हैं. इस बीच जब स्थिति खराब हो रही है तो इलाज के लिए हॉस्पिटल पहुंच रहे हैं.
जहां टेस्ट के बाद पता चल रहा कि वे पॉजिटिव हैं और अबतक न जाने कितने लोगों को बीमारी बांट चुके होते हैं. इतना ही नहीं कई लोग तो जानबूझ कर सिंप्टम्स के बावजूद घर में बैठे हैं कि कहीं लोग उसकी कंप्लेन न कर दें.
बतातें चलें कि वायरस की चपेट में आने के बाद, इसके लक्षण दिखाई देने में आमतौर पर 5–6 दिन लगते हैं. हालांकि, कुछ मामलों में लक्षण दिखने में 14 दिन भी लग सकते हैं. ऐसे में रिपोर्ट में देरी भी बीमारी को बढ़ा सकती है.
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रिपोर्ट मिलने में देरी न बढ़ा दे बीमारी
रिम्स, सदर के अलावा सिटी के कई सेंटरों में कोविड सैंपल कलेक्शन का काम किया जा रहा है. इसके बाद 9 दिनों तक लोगों को रिपोर्ट का कुछ पता ही नहीं चल पा रहा है. रिपोर्ट काउंटर और वेबसाइट पर खंगालने के बाद भी रिपोर्ट नहीं मिल रही है.
इस चक्कर में लोग इलाज कराने भी नहीं जा रहे हैं कि उन्हें सच में कोरोना है या केवल लक्षण है. कई लोगों की बीमारी इस वजह से भी बढ़ रही है.
इन मरीजों की घर में बिगड़ी स्थिति
किशोरगंज में ए कुमार के परिजन को कोरोना के सिंप्टम्स थे. उन्होंने घर में रहना उचित समझा. इस बीच ऑक्सीजन लेवल डाउन होनेलगा तो तत्काल आक्सीजन की व्यवस्था की गयी. टेस्ट में पता चला कि वे पॉजिटिव हो गये हैं. अब तो उन्हें कहीं बेड भी नहीं मिल पा रहा है तो घर में ही आइसोलेशन में हैं.
मोरहाबादी में भी एक महिला को लंबे समय से बुखार आ रहा था. हल्की खांसी भी थी और गले में खराश की समस्या हो रही थी. उन्होंने टेस्ट कराने का सोचा लेकिन जा नहीं पायीं.
जब टेस्ट कराया तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी. एक हफ्ते तक प्रापर मेडिसीन नहीं लेने से उनकी स्थिति खराब हो गयी. फिलहाल होम आइसोलेशन में उनका इलाज चल रहा है.
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इन बातों का रखें ध्यान
- बुखार
- सूखी खांसी
- थकान
- खुजली और दर्द
- गले में खराश
- दस्त
- आंख आना
- सिरदर्द
- स्वाद और गंध का पता न चलना
- सांस लेने में दिक्कत या सांस फूलना
- सीने में दर्द या दबाव
- बोलने या चलने-फिरने में असमर्थ
- लक्षण इग्नोर करना पड़ेगा भारी
डॉ बीके मिश्रा, चेस्ट स्पेशलिस्ट की मानें तो अभी के समय में लक्षण को इग्नोर करना भारी पड़ सकता है. वायरल कोई भी फीवर तीन से चार दिन में दवा लेने पर ठीक हो जाता है. इसके बाद भी अगर समस्या बनी हुई है तो चिंता का विषय है. इसलिए लापरवाही बिलकुल न बरतें तो परेशानी से बच सकते हैं.
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