
Ranchi : आदिवासी कुड़मि समाज का एक प्रतिनिधिमंडल रांची सांसद संजय सेठ से मिला. जहां उन्होंने सांसद संजय सेठ को कुड़मियों की मातृभाषा कुड़माली को जनजातीय भाषा के तौर पर स्वतंत्र रुप से भाषा कोड लागू कराने को लेकर ज्ञापन सौंपा. संजय सेठ ने मामले की गंभीरता और महत्व को समझते हुए बात को उचित पटल तक पहुंचाकर यथोचित संसोधन कराने का आश्वासन दिया है. मौके संगठन द्वारा सांसद महोदय को कुड़मालि संस्कृति का प्रतीक पीला गमछा ओढ़ाकर अभिवादन किया गया.
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विदित हो कि उक्त मांग को लेकर संगठन विभिन्न माध्यमों से विगत लगभग 01 साल से राज्य से लेकर केंद्र स्तर तक संघर्षरत है. ज्ञापन के अनुसार आगामी जनगणना में “कुड़मालि” के स्थान पर पूर्ववत कुरमाली थार को ही यथावत रखा गया है, जबकि “कुड़माली” को अन्य के तहत रखा जा रहा है. यह भाषा राज्य के द्वितीय राजभाषा के रुप में दर्ज है.
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भाषा का पठन पाठन राज्य के पांच एवं प. बंगाल के एक समेत कुल छः विश्वविद्यालयों में होता है. इसके बाद भी पहचान नहीं मिलना बेहद ही पक्षपातपूर्ण एवं अन्यायपूर्ण है. यह लगभग 02 करोड़ से भी अधिक कुड़मालि भाषा-भाषी जनों के लिए बेहद ही निराशाजनक एवं विडंबनापूर्ण है. यह उन लाखों कुड़माली छात्र-छात्राओं के भविष्य के साथ भी एक खिलवाड़ है. राज्य और केंद्र सरकार के नकारात्मक रवैये से समाज में व्यापक रोष उत्पन्न हुआ है. अगर 20 से 25 दिनों के भीतर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो समाज आंदोलन के लिए बाध्य होगी.
प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष प्रसेनजीत महतो, महासचिव बैजनाथ महतो, उपाध्यक्ष निरंजन महतो, मनोज महतो, शंकरलाल महतो, टेकलाल महतो, शैलेश महतो, जगतपाल महतो, राजेश महतो, सिकंदर महतो, संतोष महतो, संदीप महतो, पप्पु महतो आदि शामिल रहे.
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