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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कल,राजधानी रांची में है जोरदार तैयारी

Ranchi: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी कल यानी 30 अगस्त को है. इस दिन रात 12. 13 बजे तक अष्टमी है. कृतिका नक्षत्र भी मिल रहा है. साथ ही उदयाकाल से निशिथकाल (अर्द्धरात्रि) तक अष्टमी तिथि मिलने के कारण इस दिन जन्माष्टमी मनायी जायेगी. वहीं, 31 अगस्त को रोहिणी नक्षत्र उदयाकाल में मिल रहा है. इस वर्ष भी पूजा का स्वरूप बदला रहेगा. कोरोना महामारी को देखते हुए मंदिरों में भगवान की पूजा अर्चना सादगी के साथ होगी. मंगल आरती कर उन्हें धनिया, मिश्री और मक्खन का भोग लगाया जायेगा. इसके बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जायेगा.

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राजधानी में सज गये हैं लड्डू गोपाल

कृष्ण जन्माष्टमी को देखते हुए राजधानी रांची में लड्डू गोपाल की आकर्षक मूर्तियां सज गयीं हैं. साथ ही पोषाक,मास्क, मोर, पंख, बांसुरी व माला बाजार में दिख रहीं हैं.

इस तरह रखें व्रत

जिस तरह एकादशी के व्रत की शुरुआत दशमी तिथि से हो जाती है, उसी तरह जन्माष्टमी के व्रत की शुरुआत सप्तमी तिथि से हो जाती है. सप्तमी तिथि के दिन से ही तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज, बैंगन, मूली आदि का त्याग कर देना चाहिए और सात्विक भोजन करने के बाद ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए. जन्माष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सुबह स्नान व ध्यान से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र पहनें और जन्माष्टमी के व्रत का संकल्प लेना चाहिए. इसके बाद ”ममखिलपापप्रशमनपूर्वक सवार्भीष्ट सिद्धये, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी व्ररमहं करिष्ये।” मंत्र का जप करना चाहिए. इस दिन आप फलाहार और जलाहार व्रत रख सकते हैं लेकिन सूर्यास्त से लेकर कृष्ण जन्म तक निर्जल रहना होता है. व्रत के दौरान सात्विक रहना चाहिए. वहीं शाम की पूजा से पहले एक बार स्नान जरूर करना चाहिए.

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इस तरह करें जन्माष्टमी की पूजा

भगवान श्रीकृष्ण का पर्व रोहिणी नक्षत्र में आधी रात को हुआ था, ऐसे में रात को पूजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण की पूजा अर्चना करने से सभी तरह के दुखों का अंत हो जाता है. ऐसे में जन्माष्टमी के दिन व्रत रखते हुए भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप की आराधना करें. मूर्ति स्थापना के बाद उनका गाय के दूध और गंगाजल से अभिषेक करें. फिर उन्हें मनमोहक वस्त्र पहनाएं. मोर मुकुट, बांसुरी, चंदन, वैजयंती माला, तुलसी दल आदि से उन्हें सुसज्जित करें. फूल, फल, माखन, मिश्री, मिठाई, मेवे, धूप, दीप, गंध आदि भी अर्पित करें. फिर सबसे अंत में बाल श्रीकृष्ण की आरती करने के बाद प्रसाद का वितरण करें.

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