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देख रहा है न बिनोद! बागबेड़ा पंचायत ऑफिस का ‘कुर्सी घोटाला’, इसी चलते नयका मुखिया भी प्रभार नहीं ले रहा है

Jamshedpur : ओटीटी प्लेटफॉर्म पर एक वेब सिरीज काफी चर्चा में है.अमेजन प्राइम वीडियोज की इस सुपरहिट वेब सीरीज ‘पंचायत 2’ ने सफलता के ऐसे झंडे गाड़े हैं कि इसे सोशल मीडिया पर साल 2022 का शोले कहा जा रहा है. इस सिरीज में एक पात्र है बिनोद. बिनोद एक आम आदमी का प्रतीक है. एक और पात्र है भूषण यानी बनराकस. बनराकस एक ऐसा किरदार है, जो पंचायत के मौजूदा सिस्टम का मुखर विरोधी है. इस वेब सीरीज में अकसर ‘बनराकस’ प्रधानजी और पंचायत सचिव के खिलाफ ‘बिनोद’ को भड़काने की कोशिश करता है. इस सीन का एक डायलॉग- “देख रहा है न बिनोद.” मीम्स बनकर इंटरनेट पर छाया हुआ है.  लेकिन झारखंड में हाल ही में संपन्न त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के बाद कुछ नव निर्वाचित मुखिया ही “बनकराकस” की भूमिका में आ गये हैं. “देख रहा है न बिनोद” तो एक उपमा है लेकिन पूर्वी सिंहभूम जिले के एक निव निर्वाचित मुखिया ने स्टॉक रजिस्टर में कुर्सी घोटाले की बात कहते हुए कार्यालय का प्रभार लेने से ही इंकार कर दिया है.
260 कुर्सियों की खरीद हुई, मिलीं मात्र 26
मामला जुगसलाई सह गोलमुरी प्रखंड की बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत का है. वहां हाल ही में प्रखंड विकास पदाधिकारी के आदेश पर प्रखंड पंचायत पदाधिकारी वीर कुंवर सिंह देव ने भंडार पंजी का भौतिक सत्यापन किया. इसमें कार्यालय में मात्र 26 फाइबर कुर्सियां मौजूद पायी गयीं. जबकि पिछले दो कार्यकाल में पंचायत ऑफिस के लिए 260 से अधिक कुर्सियों की खरीददारी की गयी थी. इसपर नवनिर्वाचित मुखिया राजकुमार गौड़ ने इस भंडार पंजी को स्वीकार करने से इंकार कर दिया. उन्होंने कहा कि पंचायत भवन में कई सामान गायब है और कई बेहद बुरी हालत में हैं. ऐसी हालत में चार्ज लेना संभव नहीं है. राजकुमार ने कहा कि पिछले कार्यकाल में तकरीबन 150 से 200 फाइबर कुर्सियों की खरीददारी हुई है. वर्ष 2010-15 के कार्यकाल में भी 60 कुर्सियां खरीदी गयी थीं. यानी भंडार में कम से कम 260 कुर्सियां होनी चाहिए, लेकिन पंचायत भवन में 26 कुर्सियां ही मौजूद हैं, तो बाकी कुर्सियां कहां गयीं.

भौतिक सत्यापन की कॉपी वर्तमान निर्वाचित मुखिया राजकुमार को दे दी है. पुराने मुखिया से वर्तमान मुखिया को प्रभार दिलाना ग्राम सेवक अर्थात पंचायत सचिव का काम है. – वीर कुंवर सिंह देव , प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी

जानकारी के अनुसार बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत की पूर्व मुखिया बहामुनी हेंब्रम वर्ष 2015-2022 तक रहीं. उनके कार्यकाल में करीब ढाई सौ फाइबर कुर्सियों की खरीददारी हुई थी. प्रत्येक कुर्सी 750 रुपये की दर से खरीदी गयी थी. ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर कुर्सियां कहां गयीं.  वर्तमान मुखिया राजकुमार ने यह भी आरोप लगाया है कि सेंटर टेबल टूटी-फूटी हालत में है. पंचायत भवन का प्रिंटर और जेरॉक्स मशीन काम नहीं कर रही है.  शौचालय पूरी तरह से जाम होकर नर्क बना हुआ है. ऐसे में पंचायत भवन में चार्ज लेना गुनाह है.

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