
- बिहार चुनाव और जाति समीकरण को देख AICC नेताओं ने दिखायी रुचि.
- मजबूत पकड़ और पार्टी के प्रति समपर्ण भाव देख तीन नेता बनेंगे मंत्री.
Nitesh Ojha
Ranchi : जेएमएम के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद की शपथ लिये करीब 20 दिन बीत चुके हैं. लेकिन अभी तक उनके मंत्रिमंडल का असली स्वरूप सामने नहीं आया है. इसके पीछे जेएमएम और कांग्रेस कोटे में कुछ राजनीतिक पेंच फंसने की बात की जा रही है.
इस बीच न्यूज विंग को अपने दिल्ली सूत्रों से पुख्ता जानकारी मिली है कि कांग्रेस कोटे के तीन मंत्री कौन होंगे. इसपर सहमति लगभग बन चुकी है. इसमें पूर्व में कैबिनेट मंत्री रह चुके बेरमो विधायक राजेंद्र प्रसाद, जमशेदपुर पश्चिम विधायक बन्ना गुप्ता और महगामा सीट से पहली बार विधायक बनी दीपिका पांडेय सिंह शामिल हैं.
बताया जा रहा है कि जाति समीकरण और महिला कोटे को देखने के साथ पार्टी के प्रति इनका समर्पण, दिल्ली तक इनकी पहुंच और पूर्व के अनुभव को देख कर ही एआइसीसी के शीर्ष नेता इनके नामों पर सहमत हुए हैं. हालांकि इससे पहले जरमुंडी विधायक बादल पत्रलेख को भी मंत्री की रेस में काफी आगे माना जा रहा था.
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अल्पसंख्यक और आदिवासी कोटे से बन चुके हैं मंत्री, बिहार चुनाव पर भी है नजर
पार्टी कोटे से मंत्री बनाने के लिए दिल्ली नेतृत्व जहां जाति समीकरण पर प्रमुखता से नजर रखे हुए है. वहीं पड़ोसी राज्य बिहार के चुनाव पर पार्टी प्रमुखता से विचार कर रही है.
इससे पहले अल्पसंख्यक कोटे से विधायक दल के नेता आलमगीर आलम और आदिवासी कोटे से प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव को मंत्री बनाया गया है. इस कोटे से पार्टी अब किसी और को मंत्री बनाकर पार्टी जाति समीकरण को तोड़ना नहीं चाहती है.
प्रमंडल समेत जाति समीकरण को भी साधना चाह रही पार्टी
इन तीनों के मंत्री बनाने के पीछे की कहानी प्रमंडलीय अनुसार पार्टी की मजबूती के साथ जाति समीकरण को भी साधना है. संथाल और दक्षिण छोटानागपुर से दो नेताओं के मंत्री बनाने के बाद पार्टी ने कोल्हान और उत्तरी छोटानागपुर को भी ध्यान में रखा है.
पलामू प्रमंडल से पार्टी ने मनिका (रामचंद्र सिंह) सीट जीती है. लेकिन विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ही उन्होंने आरजेडी छोड़ कांग्रेस का दामन थामा था. उत्तरी छोटनागपुर से राजेंद्र सिहं के मंत्री बनने के पीछे फारवर्ड कोटे (क्षत्रिय जाति) को देखा गया है. इस कोटे से बादल पत्रलेख (ब्राह्राण कोटे) के नाम पर भी काफी चर्चा थी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व ने राजेंद्र सिंह के पहले के अनुभव समेत उनके इंटक के प्रभाव को प्रमुखता से ध्यान में रखा गया है.
कोल्हन से बन्ना गुप्ता के पीछे ओबीसी समीकरण को ध्यान में रखा गया है. वहीं दीपिका पांडेय सिंह के पीछे महिला कोटे के साथ गोड्डा जिला अध्यक्ष होने के दौरान उनके कामों को काफी तरजीह मिली है.
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राजेंद्र सिंह 6 बार जीते हैं चुनाव, पार्टी में है मजबूत पकड़

कांग्रेस कोटे से तीन नामों के पीछे एआइसीसी के नेताओं ने इनके राजनीतिक पकड़ को काफी तरजीह दी है. बेरमो विधायक राजेंद्र सिंह की बात करें, तो कांग्रेस के 16 विधायकों में वे ही एक ऐसे नेता हैं, जो सबसे अधिक (छह बार) (1985 में पहली बार विधायक बने) प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.
आलमगीर आलम (4 बार) और रामेश्वर उरांव (1 बार) को मंत्री बनाने के बाद उनका मंत्री बनना तय माना जा रहा था. इसके अलावा इंटक के कद्दवार नेता के रूप में विशेष प्रभाव, तीन बार मंत्री, दो बार नेता प्रतिपक्ष, दो बार विधायक दल नेता, पार्टी के प्रति समर्पण होने के साथ 2013 में बने हेमंत सरकार को चलाने में उनकी रणनीति को भी शीर्ष नेतृत्व ने तरजीह दी है.
ओबीसी वोट बैंक को नजरअंदाज नहीं करना चाहती पार्टी

2009 में पहली बार विधायक बने बन्ना गुप्ता को मंत्री इसलिए बनाया जाना है, क्योंकि कोल्हन से पार्टी का बड़ा चेहरा होने के साथ-साथ ओबीसी जाति को भी साधना है. हालांकि चाईबासा सीट से सोनराम सिंकु ने भी चुनाव जीता है. लेकिन उन्होंने पहली बार चुनाव जीता है.
इसके अलावा आदिवासी कोटे से पहले ही रामेश्वर उरांव को मंत्री बनाया जा चुका है. ओबीसी वोट बैंक की संख्या, पूर्व के हेमंत सरकार में कैबिनेट मंत्री (बड़कागांव से पूर्व विधायक योगेंद्र साव के हटने के बाद वे ही पूर्व में हेमंत सरकार में मंत्री बने थे) को देखते हुए उन्हें मंत्री बनाने पर शीर्ष नेतृत्व सहमत हैं.
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मजबूत लॉबिंग और बेहतरीन काम से दीपिका को मिलेगा मंत्री पद

संथाल परगना के महगामा सीट से पहली बार विधायक बनी दीपिका पांडेय सिंह के मंत्री बनने के पीछे राष्ट्रीय स्तर पर महिला कांग्रेस की उनकी मजबूत पकड़ को ध्यान में रखा गया है.
गौरतलब है कि दीपिका पांडेय सिंह अभी महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव के पद पर है. इसके अलावा दिल्ली में मजबूत लॉबिंग, परिवार से ज्यादा पार्टी को तरजीह देने और गोड्डा जिला अध्यक्ष रहते हुए क्षेत्र में बेहतरीन काम को देखते हुए शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें मंत्री बनाने पर रुचि दिखायी है.




