
Ranchi: गढ़वा के चित्तविश्राम पंचायत के मुखिया मुश्ताक अहमद शेख का वित्तीय अधिकार जब्त करने का आदेश एसडीओ कमलेश्वर नारायण ने दिया है.
पंचायत भवन में बने क्वारेंटाइन सेंटर में भर्ती 6 लोगों के भाग जाने की सूचना पर मुखिया और अन्य लोगों के खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का आदेश भी दिया गया है.
सेंटर में ताला लगे होने और भर्ती किये गये लोगों के गायब रहने के मामले को गढ़वा प्रशासन ने गंभीरता से लिया है.
इधर मुखिया संघ ने सरकार से अपील की है कि कोरोना संकट के दौरान मुखिया की वित्तीय शक्ति जब्त करने के मामले में रियायत रखी जाये.
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मुखिया के अधिकारों को जब्त करने की प्रक्रिया हुई शुरू : एसडीओ
नगर उंटारी के एसडीओ कमलेश्वर नारायण के अनुसार अभी कोरोना संकट के दौरान डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है. मुखिया ने कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही की है.
पंचायत में बने क्वारेंटाइन सेंटर में ठहरने वालों को रोके जाने और समुचित व्यवस्था बनाये रखने के मामले में मुखिया ने विधिसम्मत तरीके से काम नहीं किया है.
भर्ती लोगों के गायब होने की सूचना मुखिया ने प्रशासन को नहीं दी थी. ऐसी चूक पर पंचायती राज विभाग को उसके वित्तीय अधिकारों को जब्त करने के लिए अनुशंसा की जा रही है.
इसके अलावा जो 6 लोग सेंटर से भागे थे, सबों के खिलाफ एफआइआर की गयी है. रोजगार सेवक को सेंटर का प्रभारी बनाया गया था. लापरवाही साबित होने की स्थिति में उसे सेवामुक्त तक किये जाने का विचार है.
सभी सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर में एक–एक चौकीदार को स्थानीय थाना के सहयोग से नियुक्त किया गया है. सेंटर में ठहराये जाने वाले लोगों को हर हाल में सरकारी निर्देशों के अनुरूप निर्धारित गाइड लाइन का पालन करना ही होगा.
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कोरोना संकट की घड़ी में वित्तीय शक्ति को जब्त करने में बरती जाये उदारता : विकास महतो
प्रदेश मुखिया संघ के प्रमुख विकास महतो के मुताबिक पंचायती राज नियमावली में किसी मुखिया के वित्तीय और अन्य पावर को जब्त किये जाने के मामले में स्पष्ट निर्देश हैं.
इसके बावजूद पंचायतों में होने वाली हर छोटी बड़ी बात पर मुखिया और पंचायत प्रतिनिधियों को सहजता से टारगेट करके उनके हाथ बांध दिये जाते हैं.
30 से भी अधिक पंचायतों में मुखिया वित्तीय पावर वापस पाने के इंतजार में सालभर से भी अधिक समय से बैठे हुए हैं.
पंचायत स्तर पर संचालित होने वाली हर योजना और कार्यक्रम में पंचायत सचिव की भूमिका भी अहम् होती है पर किसी भी स्थिति में उसकी जवाबदेही तय नहीं की जाती.
कोरोना आपदा को रोकने के लिए बनी पंचायत स्तरीय समन्वय समिति में पंचायत सचिव, सहायिका, सेविका, शिक्षक और अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है.
सरकार के निर्देश के अनुरूप किसी भी सरकारी कर्मी को अपना मुख्यालय नहीं छोड़ना है. ऐसे में पंचायत सचिवों को पंचायत सचिवालय में रहना चाहिए पर व्यावहारिक तौर पर ऐसा हो नहीं रहा.
पंचायत सचिवालय के क्वारेंटाइन सेंटर में किसी का ठहराव सुनिश्चित करने में सभी मुखिया जोर जबर्दस्ती नहीं कर सकते.
सरकार के आदेश के बावजूद जिलों से लेकर गांवों में अब भी बार बार लोगों को अपने घरों में ठहरने की अपील करनी पड़ रही है. ऐसे में केवल मुखिया को टारगेट करना ठीक नहीं.
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