
Ranjit Kumar Singh
Dhanbad: कोरोना वायरस के दहशत के कारण लोग खौफ में जी रही हैं. इस वायरस ने इंसान को इंसान से दूर कर दिया है. यहां तक की उनके अंदर की इंसानितक को भी मार दिया है.
घटना धनबाद जिले की है जहां घटों से एक घायल बुजुर्ग रास्ते में पड़ा है लेकिन उसे उठाने वाला कोई नहीं है. दर्जनों गाड़िया इस घायल वृद्ध के पास से गुजर रही हैं लेकिन कोरोना वायरस की दहशत इतनी ज्यादा है कि कोई भी व्यक्ति इस वृद्ध के पास नहीं जा रहा है.
बेसुध अवस्था में होने के कारण वह अपना नाम भी नहीं बता पा रहा. कोरोना के डर का आलम यह है कि लोग ठिठक कर उसे देखते तो हैं लेकिन कोई उसे उठाना या अस्पताल पहुंचाना मुनासिब नहीं समझते.
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बीमार और घायलों की मदद नहीं कर रहा कोई
इस कोरोना वायरस की दहशत के बीच सभी समाजिक संस्था गरीबों को दो वक्त की रोटी तो जरूर दे रही है लेकिन अगर कोई बीमार है या घायल अवस्था मे सड़क पर पड़ा है तो उसे देखने वाला कोई नहीं है.
लोगों को इस बात का डर सताने लगता है कि बीमार या घायल व्यक्ति कोरोना संक्रमित तो नहीं. ऐसे में अगर अगर कोई उस व्यक्ति के संपर्क में आया तो वह भी वायरस की चपेट में आ सकता है.
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पुलिस भी शव उठाने से करती है परहेज
इससे पहले 11अप्रैल को झरिया के सोनापट्टी मुहल्ले में एक लावारिस शव बरामद किया गया था. शव एक दुकान के समीप एक चबूतरे पर पड़ा हुआ था. स्थानीय लोगों ने इसकी सूचना थाना को दी. सूचना मिलने के करीब पांच घंटे बाद पहुंची पुलिस कोरोना के डर से शव को उठाने से परहेज करती रही. काफी मशक्कत के बाद शव को कब्जे में लेकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा सका.
पुलिस ने शव की शिनाख्त करवाने की कोशिश की लेकिन उसकी शिनाख्त नहीं हो पायी. स्थानीय लोगों ने बताया कि वह सोनापट्टी मुहल्ले में मोटिया मजदूर का काम करता था. रात में वह सड़क किनारे सोकर अपना समय व्यतीत कर रहा था. स्थानीय लोगों के अनुसार लॉकडाउन के कारण उसे कोई काम नहीं मिल रहा था जिसकी वजह से उसकी मौत भूख और बीमारी से हो गयी.
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