
- 26 नवंबर के देशव्यापी हड़ताल पर ट्रेड यूनियनों ने किया कन्वेंशन, अभियान चला लोगों को दी जायेगी जानकारी
Ranchi: केंद्र सरकार की योजनाएं किसान और मजदूर विरोधी हैं. श्रम कानूनों में बदलाव के बाद केंद्र सरकार किसान और मजदूर विरोधी कानून लायी जिसका विरोध किया जाना जरूरी है. देश के अलग-अलग हिस्सों में इन कानूनों का विरोध भी किया जा रहा है.
उक्त बातें ऑल इंडिया कोल वर्कर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव डीडी रामानंदन ने कही. वे गुरुवार को संयुक्त ट्रेड यूनियनों के कन्वेंशन को संबोधित कर रहे थे.
कन्वेंशन का आयोजन मुख्य रूप से श्रम कानूनों, कृषि बिल और निजीकरण के विरोध में किया गया. रामानंदन ने इस दौरान कहा कि 26 नवंबर को देश भर में हड़ताल किया जायेगा. ऐसे में राज्य में भी इस हड़ताल को सफल बनाया जायेगा.
कंवेशन में 12 सेक्टरों के 223 प्रतिनिधि शामिल हुए. कंवेंशन में हड़ताल की सफलता के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाने का निर्णय लिया गया. इस दौरान 25 नवंबर को हर स्तर पर मशाल जुलूस निकाले जाने का आह्वान किया गया.
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राष्ट्र की संपत्ति विदेशी कंपनियों को बेची जा रही
इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि केंद्र सरकार देश की संपत्ति बेच रही है. कॉरपोरेटों को लाभ पहुंचाने के लिए योजनाएं बनायी जा रही है. आत्मनिर्भर भारत योजना भी इसी के तहत बनाया गया. रेलवे, एलआइसी, इस्पात, पेट्रोलियम लगभग सभी क्षेत्रों पर केंद्र सरकार की नजर है जिसे रोकना होगा. इस दौरान प्रस्ताव लाया गया कि किसानों और मजदूरों के साथ इन मुद्दों पर आंदोलन किया जायेगा.
प्रस्ताव लाया गया कि 26 नवंबर के आंदोलन में लोग बढ़-चढ़ कर भाग लेंगे. इस दौरान शारीरिक दूरी और स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देशों का पालन किया जायेगा. वक्ताओं ने कहा कि कोरोना महामारी के समय केंद्र सरकार ने फायदा उठाया है और जन विरोधी निर्णय लिया है.
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ये है मांग
वक्ताओं ने मजदूर विरोधी श्रम कोड, किसान और कृषि विरोधी अधिनियम वापस लेने, अलग अलग सेक्टरों से निजीकरण का निर्णय वापस लेने, रोजगार, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सभी के लिए पेंशन की गारंटी समेत अन्य मांग किये गये है.
वहीं मजदूरों को 7500 रुपये हर महीने बैंक ट्रांसफर में देने की मांग की जायेगी. मौके पर सीटू के राज्य महासचिव प्रकाश विप्लव, एटक के अजय सिंह, एक्टू के भुवनेश्वर केवट समेत अन्य लोग उपस्थित रहें.
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